बनखंडा में सजा आस्था का विराट पर्व, ऐतिहासिक अजगर-बसंती माता मेले में उमड़ा जनसैलाब*

बनखंडा में सजा आस्था का विराट पर्व, ऐतिहासिक अजगर-बसंती माता मेले में उमड़ा जनसैलाब ।
सदियों पुरानी परंपरा के साक्षी बने लाखों श्रद्धालु, पूजा-अर्चना, भंडारे और दंगल प्रतियोगिताओं ने बढ़ाई मेले की रौनक ।
दयानन्द कुमार, प्राइम इंडिया न्यूज संवाददाता , हापुड़ ।
हापुड़ जनपद के बाबूगढ़ क्षेत्र स्थित बनखंडा गांव में सोमवार को ऐतिहासिक श्री अजगर-बसंती माता मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। लगभग पांच शताब्दियों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा में श्रद्धा और आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। दूर-दराज के गांवों और शहरों से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में मत्था टेककर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मेले के उद्घाटन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। इसके बाद मेले का शुभारंभ किया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर और मेले के मैदान में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जो देर शाम तक लगातार बनी रही। श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर प्रसाद अर्पित किया और धार्मिक आयोजनों में भाग लिया।
स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। माना जाता है कि सदियों पहले क्षेत्र को महामारी से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से आयोजित एक महायज्ञ में अजगर और बसंती नामक दो कन्याओं ने लोककल्याण के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी स्मृति और त्याग को सम्मान देने के लिए प्रतिवर्ष यहां विशाल यज्ञ और मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मेले में श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। समाजसेवी आशुतोष त्यागी के सहयोग से आयोजित भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद वितरण केंद्रों पर दिनभर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और सेवा कार्य में जुटे स्वयंसेवक पूरी तत्परता से व्यवस्थाओं को संभालते नजर आए।
धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ पारंपरिक दंगल प्रतियोगिताओं ने भी लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। विभिन्न क्षेत्रों से आए पहलवानों ने अखाड़े में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए रोमांचक मुकाबले पेश किए। कुश्ती देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ अखाड़े के आसपास जुटी रही और पहलवानों का उत्साहवर्धन करती दिखाई दी।
मेले में धार्मिक आस्था के साथ ग्रामीण संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और लोक परंपराओं की अनूठी छटा देखने को मिली। श्रद्धालुओं, ग्रामीणों और क्षेत्र के गणमान्य लोगों की उपस्थिति से आयोजन को भव्य स्वरूप मिला। वहीं मेले के दौरान सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक अधिकारी एवं पुलिस बल भी पूरी तरह सतर्क दिखाई दिया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
