नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सरकार को सुझाव दिया है कि UPI लेनदेन को कुछ और सालों तक बिना किसी फीस के जारी रखा जाए।

*UPI फीस पर सुझाव*
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सरकार को सुझाव दिया है कि UPI लेनदेन को कुछ और सालों तक बिना किसी फीस के जारी रखा जाए।
PTI से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को UPI को एक *पब्लिक गुड* के तौर पर देखना चाहिए। इसके फायदे, इसे चलाने के लिए सरकारी खजाने पर आने वाले करीब 20,000 करोड़ रुपये के खर्च से कहीं ज्यादा हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक *Currency-to-GDP Ratio* में गिरावट नहीं दिखती, तब तक जीरो-फीस व्यवस्था जारी रखनी चाहिए।
राजीव कुमार ने चेतावनी दी कि 96% ट्रांजेक्शन भले ही 2000 रुपये से कम के हों, लेकिन वैल्यू के हिसाब से 66% ट्रांजेक्शन 2000 रुपये से ऊपर के हैं। ऐसे में छोटी सी भी फीस लगाने पर लोग फिर से कैश की तरफ लौट सकते हैं।
गौरतलब है कि सरकार ने 15 सितंबर को ऐलान किया था कि 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4% MDR फीस लगेगी। हालांकि P2P और 2000 रुपये तक का भुगतान अभी भी फ्री रहेगा।
