October 2, 2026

अस्पताल के दरवाजे पर तड़पती रही मां, सड़क किनारे गूंजी नवजात की किलकारी !

अस्पताल के दरवाजे पर तड़पती रही मां, सड़क किनारे गूंजी नवजात की किलकारी !
  1. अस्पताल के दरवाजे पर तड़पती रही मां, सड़क किनारे गूंजी नवजात की किलकारी! यू

“मुसहर हो… डिलीवरी नहीं कराएंगे” के आरोप ने भदोही से लेकर लखनऊ तक स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल

प्राइम इंडिया न्यूज | भदोही

उत्तर प्रदेश के भदोही में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव पीड़ा से कराहती 20 वर्षीय महिला को ज्ञानपुर स्थित महाराजा चेतसिंह राजकीय जिला अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया था। आरोप है कि महिला के मुसहर समुदाय से होने के कारण उसके साथ कथित तौर पर भेदभाव किया गया और प्रसव कराने से इनकार कर दिया गया।

हालात इतने गंभीर हो गए कि अस्पताल के बाहर सड़क किनारे महिला का प्रसव हुआ। जिस समय एक गर्भवती महिला को डॉक्टरों की निगरानी, सुरक्षित प्रसव और तत्काल चिकित्सा सहायता मिलनी चाहिए थी, उस समय अस्पताल के बाहर प्रसव की तस्वीर ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में महिला को भर्ती करने और प्रसव कराने को लेकर कथित तौर पर यह कहा गया—“मुसहर हो… डिलीवरी नहीं कराएंगे।” हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से महिला की गंभीर एनीमिया की स्थिति और उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किए जाने की बात कही गई है। जातिगत भेदभाव के आरोपों की जांच भी कराई गई।

मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच कराई। जांच के बाद अस्पताल के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक की सेवा समाप्त करने, स्टाफ नर्स के स्थानांतरण और वेतन संबंधी कार्रवाई के साथ अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की गई।

सवाल सिर्फ एक प्रसव का नहीं, व्यवस्था की जवाबदेही का है

सरकारी अस्पताल गरीब और वंचित परिवारों के लिए इलाज का सबसे बड़ा सहारा हैं। ऐसे में यदि प्रसव पीड़ा में पहुंची महिला को अस्पताल के बाहर प्रसव की स्थिति का सामना करना पड़े, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर चिकित्सा व्यवस्था में ऐसी स्थिति पैदा कैसे हुई?

क्या महिला को समय पर उचित चिकित्सा सुविधा मिली थी?
रेफर करने की प्रक्रिया क्या थी?
अस्पताल के बाहर प्रसव की नौबत क्यों आई?
और लगाए गए जातिगत भेदभाव के आरोपों की पूरी सच्चाई क्या है?

इन सवालों का जवाब जांच के जरिए स्पष्ट होना चाहिए।

अस्पताल इलाज और सुरक्षा देने के लिए हैं या मरीजों को अस्पताल के दरवाजे तक पहुंचाकर वापस लौटाने के लिए?

इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि किसी भी महिला को उसकी सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर इलाज और सम्मा कोन से वंचित न होना पड़े।

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