September 27, 2026

एक दिन वोटर कांशीराम को फंड देने के लिए घंटों लाइन में खड़े नज़र आएंगे – साहब कांशीराम*

एक दिन वोटर कांशीराम को फंड देने के लिए घंटों लाइन में खड़े नज़र आएंगे – साहब कांशीराम*

*एक दिन वोटर कांशीराम को फंड देने के लिए घंटों लाइन में खड़े नज़र आएंगे – साहब कांशीराम*

8 मार्च 1987 को जब प्रसिद्ध पत्रकार निखिल नारायण ने साहेब कांशीराम के साथ किए लंबे चौड़े इंटरव्यू में यह सवाल पूछा कि आपने लखनऊ की बसपा रैली में बेतहाशा पैसा खर्च किया तो मान्यवर का जोरदार जवाब था कि केवल बसों को किराए पर लेने के लिए ही 22 लाख रुपया खर्च आया। लेकिन मैं नाराज हूं क्योंकि यह खर्चा 22 करोड़ होना चाहिए था। मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं है। एक समय आएगा कि मेरे आदेश पर लोग ₹22करोड़ भी खर्च कर देंगे। अगर तो खजाने में से पैसा आता तो यह खाली हो जाता। मैं लगातार चलने वाले स्रोतों से पैसा ले रहा हूं। मुझे लोकसभा की 542 सीटें जीतने के लिए केवल ₹1 करोड़ ही चाहिए। एक दिन वोटर कांशीराम को पैसा देने के लिए घंटों लाइन में खड़े हुआ करेंगे और अगले दिन वही वोटर कांशीराम को वोट देने के लिए लाइन में खड़े नजर आएंगे। जब साहिब से पत्रकार निखिल ने यह जानना चाहा कि “आपके फंडों के पीछे कुछ रहस्य हैं” तो साहिब का स्टीक उत्तर था कि मेरे पास फंड अलग-अलग स्रोतों से आते हैं जो कभी भी खत्म नहीं हो सकते। मेरे फंड ऐसे लोगों से होते हैं जो दौलत पैदा करते हैं ।मैं उन्हीं से पैसे लेता हूं। लाखों लोग त्योहार जैसे कि कुंभ मेला आदि , उस पर खर्च करते हैं केवल अगला जन्म सुधारने के लिए। उनको समझाता हूं कि मैं अगले जन्म के बारे में कुछ नहीं जानता, लेकिन मैं वर्तमान जिंदगी का स्पेशलिस्ट हूं। मैं कहता हूं कि जिन्हें अगला जन्म सवारना है वह गंगा नदी के किनारे बैठे ब्राह्मणों के पास चले जाएं और जिनको वर्तमान जिंदगी संवारनी है ,वह लोग मेरे पास आ जाएं। इसलिए मेरी रैलियों में शामिल होने के लिए दौड़ते हैं।और सवाल था “राजनीतिक लोगों के साथ दिल्ली में बातचीत हुई ,उनका कहना है कि अगर बसपा ने कुछ ज्यादा ही लड़ाकूपन दिखाया तो उन्हें राजनीति में समाप्त कर देंगे” के संबंध में जवाब देते हुए साहब ने कहा कि हम उन्हीं को खत्म करके रख देंगे ।क्योंकि जब इंदिरा गांधी चमारों द्वारा खत्म की जा सकती है तो बाकी के यह लोग कैसे बचे रह सकते हैं। जबकि हम हथियारबंद फौज में 90% बीएसएफ में 70% सीआरपीएफ तथा पुलिस में 50% हैं तो फिर हमारे साथ कौन अन्याय कर सकता है। एक जनरल के लिए जवानों के मुकाबले कम गोलियों की जरूरत है। उनके पास जनरल हो सकते हैं जवान नहीं। मुलाकात की शुरुआत में ही जब पत्रकार ने महात्मा गांधी के बारे में सवाल किया तो साहेब का स्पष्ट जवाब था कि गांधी सभी बुराइयों की जड़ है। मैं बदलाव चाहता हूं, डॉक्टर अंबेडकर भी बदलाव चाहते थे, लेकिन गांधी यथास्थिति रखने वाले थे ।शूद्रों को शूद्र ही बनाए रखना चाहते थे। गांधी ने देश को बांटने का काम किया लेकिन हम राष्ट्र को संगठित करने का काम कर रहे हैं ।हम बनावटी बंटवारे को खत्म करके ही दम लेंगे ।

 

बैलट( वोट ) की ताकत बुलेट (गोली) से भी ज्यादा है।– साहब कांशीराम जी।

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