September 27, 2026

सरकारी दावों की खुली पोल, गांडेय के रानीटांड़ में जर्जर मिट्टी के घर में जान जोखिम में डाल रहने को विवश सुखलाल का परिवार

सरकारी दावों की खुली पोल, गांडेय के रानीटांड़ में जर्जर मिट्टी के घर में जान जोखिम में डाल रहने को विवश सुखलाल का परिवार

सरकारी दावों की खुली पोल, गांडेय के रानीटांड़ में जर्जर मिट्टी के घर में जान जोखिम में डाल रहने को विवश सुखलाल का परिवार

झारखंड बने 26 साल बाद भी वंचित है आदिवासी परिवार.टूटी छत, दरकती दीवारों के नीचे कट रही जिंदगी

 

राजु मंडल रफ्तार मीडिया संवाददाता गांडेय

 

गांडेय (गिरिडीह): सरकारें भले ही हर बेघर और गरीब को पक्की छत देने के लिए पीएम आवास, अबुआ आवास और आंबेडकर आवास जैसी योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही हों, लेकिन गांडेय प्रखंड के बरमसिया वन पंचायत अंतर्गत रानीटांड़ गांव में जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहां के निवासी सुखलाल हेम्ब्रम उनके पत्नी रानी मुर्मू और उनका परिवार आज भी मिट्टी के बेहद जर्जर और टूटे-फूटे मकान में खौफ के साए में जीने को मजबूर है।

 

*एक छत के नीचे पांच परिवार, अंदर जाने में भी लगता है डर*

 

सुखलाल हेम्ब्रम की पारिवारिक और उनकी आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। इस टूटे-फूटे मिट्टी के मकान में सुखलाल के साथ कुल पांच परिवार एक साथ रहने को विवश हैं। घर की हालत इतनी खस्ताहाल है कि छत कभी भी भरभराकर गिर सकती है और दीवारें जगह-जगह से दरक चुकी हैं। मकान के भीतर कदम रखते ही अनहोनी का डर सताने लगता है, लेकिन सिर छिपाने का कोई अन्य साधन न होने के कारण पूरा समान परिवार इसी खंडहरनुमा घर में अपनी रातें काट रहा है।

 

*बरसात में मंडराता है बड़े हादसे का खतरा*

 

परिवार के सदस्यों का कहना है कि बरसात के दिनों में घर की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। छतों से पानी टपकने और दीवारों के कमजोर होने से हर वक्त मकान ढहने की आशंका बनी रहती है। कभी भी कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है, लेकिन मजबूरी और लाचारी के कारण यह गरीब आदिवासी परिवार कहीं और जा भी नहीं सकता।

 

*26 साल बाद भी योजनाओं से कोसों दूर*

 

झारखंड राज्य अलग हुए 26 वर्ष बीत चुके हैं। इस दौरान इलाके में हजारों परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत पक्के आवास स्वीकृत किए गए, लेकिन वास्तविक रूप से जरूरतमंद इस परिवार तक अब तक प्रशासन की नजर नहीं पहुंची।

ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मामले की अविलंब जांच कराई जाए और किसी बड़े हादसे से पहले सुखलाल हेम्ब्रम के परिवार को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी आवास मुहैया कराया जाए।

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