आरक्षण वर्गीकरण विवाद के बीच देश के बड़े दलित/आदिवासी नेताओं/अधिकारियों को एक तीसरे विकल्प पर विचार करना चाहिए। 15 वर्ष तक MLA/MP और 35 वर्ष तक IAS/PCS अधिकारी रहने के बाद ऐसे SC/ ST को स्वत: आरक्षण छोड़ देना चाहिए. (बबन रावत)

आरक्षण वर्गीकरण विवाद के बीच देश के बड़े दलित/आदिवासी नेताओं/अधिकारियों को एक तीसरे विकल्प पर विचार करना चाहिए।
15 वर्ष तक MLA/MP और 35 वर्ष तक IAS/PCS अधिकारी रहने के बाद ऐसे SC/ ST को स्वत: आरक्षण छोड़ देना चाहिए. (बबन रावत)
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जो दलित/आदिवासी नेता कम से कम तीन बार (15 वर्ष) वर्ष तक MLA/MP रह चुका हो उसे स्वतः आरक्षण छोड़ देना चाहिए। ताकि उसी समाज के दूसरे दलित/आदिवासी भाई/बहनो को भी उक्त रिक्त स्थान पर आरक्षण की सहूलियत मिल सके।
ठीक इसी तरह जो दलित/आदिवासी कम से कम 35 साल तक IAS/PCS अधिकारी रह चुका हो उसे स्वतः आरक्षण छोड़ देना चाहिए. ताकि उसी समाज के दूसरे दलित/आदिवासी भाई/बहनो को भी उपतरिक्त स्थान पर आरक्षण की सहूलियत मिल सके.
नोट : यदि कोई दलित आदिवासी नेता अथवा अधिकारी ऐसा नहीं करता है, तों सरकार का यह कर्तव्य बनता है कि कानून बनाकर ऐसे लोगों का आरक्षण समाप्त कर देना चाहिए. (बबन रावत)
