September 7, 2026

अमेरिकी सैन्य दबाव से नहीं डरेगा ईरान, विदेश मंत्री अराघची का कड़ा बयान

अमेरिकी सैन्य दबाव से नहीं डरेगा ईरान, विदेश मंत्री अराघची का कड़ा बयान

परमाणु वार्ता के बीच ईरान का अमेरिका को दो टूक संदेश

तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुई परमाणु वार्ता के बीच ईरान ने एक बार फिर अपने रुख को स्पष्ट कर दिया है। ईरान ने साफ शब्दों में कहा है कि वह किसी भी सूरत में यूरेनियम संवर्धन का अधिकार नहीं छोड़ेगा और अमेरिकी सैन्य दबाव के आगे झुकने का सवाल ही नहीं उठता। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की मंशा पर संदेह जताते हुए कहा कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य तैनाती से ईरान डरने वाला नहीं है।

एक कार्यक्रम में बोलते हुए अराघची ने कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी ईरान के फैसलों को प्रभावित नहीं कर सकती। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका ने अपने सबसे शक्तिशाली युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को क्षेत्र में तैनात किया है। अराघची ने कहा कि ईरान को अमेरिका पर बेहद सीमित भरोसा है और बातचीत की गंभीरता को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।

अमेरिका की नीयत पर संदेह, चीन-रूस से भी सलाह
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका वास्तव में समाधान चाहता है या सिर्फ दबाव की रणनीति अपना रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान इस वार्ता को लेकर अपने रणनीतिक साझेदार चीन और रूस के साथ भी लगातार विचार-विमर्श कर रहा है।

पश्चिमी देशों और इस्राइल की ओर से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं, हालांकि तेहरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अराघची ने दोहराया कि ईरान किसी भी परमाणु बम की ओर नहीं बढ़ रहा है और उसकी असली ताकत स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता में है।

उन्होंने कहा, “वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम नहीं चाहते। हमारी असली शक्ति महाशक्तियों को ‘न’ कहने की क्षमता है।”

इस बीच, इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया है। अमेरिका और इस्राइल की मांग है कि बातचीत में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र संगठनों को समर्थन जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाए, लेकिन ईरान ने इसे वार्ता के दायरे से बाहर रखने की बात कही है।

अराघची ने यूरेनियम संवर्धन पर किसी भी प्रकार के समझौते से साफ इनकार करते हुए इसे रणनीतिक नहीं, बल्कि संप्रभुता का सवाल बताया। उन्होंने कहा कि चाहे ईरान पर युद्ध ही क्यों न थोपा जाए, किसी भी देश को उसके वैध अधिकार तय करने का हक नहीं है।

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