August 19, 2026

अभी बिजनेसलाइन की एक खबर है । उसमें सरकारी अधिकारी चाबहार पर सरकार की तैयारी बता रहे हैं ।

अभी बिजनेसलाइन की एक खबर है । उसमें सरकारी अधिकारी चाबहार पर सरकार की तैयारी बता रहे हैं ।

अभी बिजनेसलाइन की एक खबर है । उसमें सरकारी अधिकारी चाबहार पर सरकार की तैयारी बता रहे हैं ।

 

सरकार की तैयारी है चाबहार से पूरी तरह निकलने की। भारत सरकार 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के अपने प्रत्यक्ष निवेश से बने शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल का परिचालन ईरान को सौंपने की बातचीत कर रही है। ईरान से 2 साल पहले ही इसपर डील हुई थी, जिसमें 10 साल के लिए टर्मिनल का परिचालन हमें मिला था।

कारण जानेंगे तो डंके की आवाज और तेज हो जायेगी। कारण हैं ट्रंप और अमेरिका। अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों से हमें 2018 में छूट दे दी थी, जिससे हम चाबहार पर काम बढ़ा पाये। ट्रंप चचा ने पिछले साल सितंबर में छूट समाप्त कर दी। फिर कुछ समय के लिए आंशिक छूट दी गयी। अक्टूबर से छूट शुरू हुई। इस अप्रैल में खत्म हो गयी। अब हमारे बहादुर को लग रहा डर। जिन लाल-लाल आँखों की कल्पना पर मंदबुद्धि भक्त मोहित हैं, ट्रंप के सामने वो गुलाबी हो जाती हैं। दो साल से ट्रंप बिना नागा किये हर हफ्ते एक बार जलील करता है, लेकिन हमारे बहादुर की ठकुरसुहाती बंद होने का नाम नहीं ले रही। हाँ, लीपापोती करने के लिए सरकार सिर्फ एक तर्क मैन्युफैक्चर कर पा रही है कि हम हमेशा के लिए परिचालन नहीं सौंप रहे। जब हालात अनुकूल होंगे, हम फिर से परिचालन अपने हाथों में ले लेंगे। यहाँ हालात अनुकूल होने का अर्थ है जब ट्रंप से अनुमति मिल जायेगी।

खुले दिमाग का कोई भी व्यक्ति डंके की इन आवाजों से माथा पकड़कर बैठ जायेगा। भारत जैसी आर्थिक-सैन्य शक्ति को किसी ने ट्रंप के हाथों में गिरवी रख दिया है। कौन देश हमारा दोस्त होगा और कौन दुश्मन, यह अमेरिका तय कर रहा है। हम अपनी जरूरत के सामान कब, किससे और कितना खरीदेंगे, यह अमेरिका तय कर रहा है। हम डीजल-पेट्रोल शुद्ध यूज करेंगे या मिलावटी, यह भी अमेरिका तय कर रहा है। हम चीनी सस्ता खरीदेंगे या महँगा, यह अमेरिका तय कर रहा है। हम अमेरिका के उपनिवेश हैं क्या, जो हमारा प्रधानमंत्री हमें छोड़कर ट्रंप के प्रति जवाबदेह बना हुआ है? शर्तें तो हम सारी ही पूरी कर रहे हैं।

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.