दो मंजिला पक्का मकान मिला, फिर भी PMAY-G का लाभ

दो मंजिला पक्का मकान मिला, फिर भी PMAY-G का लाभ !
लोक शिकायत में उठा बड़ा सवाल, जांच रिपोर्ट में करीब 10 साल पुराने मकान का उल्लेख; अपात्रता साबित हुई तो राशि की रिकवरी, तथ्य छिपाने पर FIR के निर्देश
तालिमपुर पंचायत का मामला : लोक शिकायत के आदेश के बाद मधुबन BDO को विधिवत जांच और कार्रवाई का निर्देश
गुपता की रिपोट
मधुबन/पकड़ीदयाल। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के लाभ को लेकर पूर्वी चंपारण जिले के मधुबन प्रखंड की तालिमपुर पंचायत का मामला अब जांच के केंद्र में है। लोक शिकायत निवारण कार्यालय में पहुंची शिकायत की सुनवाई के दौरान अलग-अलग जांच रिपोर्ट सामने आईं। बाद में पकड़ीदयाल स्तर से कराई गई जांच में लाभार्थी के पास पहले से दो मंजिला पक्का मकान उपलब्ध होने की बात रिपोर्ट में दर्ज की गई।
शिकायतकर्ता चनुसाह, पिता स्व. जगरनाथ साह, निवासी तालिमपुर ने आरोप लगाया था कि अमिता कुमारी, पति बिरजू ठाकुर को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का लाभ कथित रूप से अपात्र होने के बावजूद दिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, लाभार्थी के पास पहले से दो मंजिला पक्का मकान मौजूद था और योजना का लाभ प्राप्त करने के दौरान इस तथ्य को छिपाया गया।
शिकायत में योजना के लाभ में कथित अनियमितता, सरकारी राशि के संभावित दुरुपयोग तथा लाभार्थी के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मामले की भौतिक जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर सरकारी राशि की रिकवरी तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
पहली जांच में सामने आई अलग स्थिति
शिकायत के बाद मधुबन प्रखंड स्तर पर जांच कराई गई। ग्रामीण आवास पर्यवेक्षक की रिपोर्ट में बताया गया कि ठाकुर परिवार के पांच भाई हैं और उनके पास संयुक्त रूप से जमीन है। रिपोर्ट के अनुसार जमीन के अलग-अलग हिस्सों में परिवार के सदस्यों के मकान हैं तथा बिरजू ठाकुर द्वारा PMAY-G की राशि से दो कमरों के आवास का निर्माण किया गया है।
हालांकि, शिकायतकर्ता चनुसाह ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि लाभार्थी के पास योजना का लाभ मिलने से पहले से ही दो मंजिला पक्का मकान मौजूद था।
इसके बाद मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए पकड़ीदयाल स्तर से जांच रिपोर्ट मांगी गई।
15 जुलाई की जांच रिपोर्ट में सामने आया महत्वपूर्ण तथ्य
15 जुलाई 2026 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में लाभार्थी अमिता कुमारी, पति बिरजू ठाकुर के आवास को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य दर्ज किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान लाभार्थी के पास दो मंजिला मकान उपलब्ध पाया गया। निरीक्षण के आधार पर मकान लगभग 10 वर्ष पूर्व निर्मित प्रतीत होने की बात भी रिपोर्ट में दर्ज है।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि उक्त मकान में “त्रिदेव सेवा सदन” के नाम से चिकित्सकीय संबंधी कार्य किए जाने की बात सामने आई।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद योजना के लाभार्थी चयन और पात्रता को लेकर सवाल और गंभीर हो गए।
लोक शिकायत में अब प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता साफ
लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने उपलब्ध अभिलेख एवं जांच प्रतिवेदन के आधार पर मधुबन के प्रखंड विकास पदाधिकारी को मामले की विधिवत जांच करने का निर्देश दिया है।
आदेश में किसी व्यक्ति को सीधे दोषी घोषित नहीं किया गया है। आदेश में कहा गया है कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि लाभार्थी अपात्र होते हुए अथवा तथ्य छिपाकर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्राप्त की है, तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अपात्रता साबित हुई तो पूरी राशि की रिकवरी
लोक शिकायत के अंतिम आदेश में सरकारी राशि की रिकवरी को लेकर स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
यदि अभिलेख एवं जांच के आधार पर आरोप प्रमाणित होता है तो लाभार्थी को भुगतान की गई समस्त राशि की वसूली सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
यानी अंतिम जांच में आरोप प्रमाणित होने की स्थिति में सरकारी खजाने से खर्च हुई राशि की वापसी की कार्रवाई की जा सकती है।
तथ्य छिपाने की पुष्टि हुई तो FIR
मामले में प्राथमिकी को लेकर भी आदेश में स्पष्ट निर्देश है। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि तथ्य छिपाकर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्राप्त किया गया, तो प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय को अवगत कराने का निर्देश दिया गया है।
अब पूरे मामले में मधुबन प्रखंड की विधिवत जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सत्यापन और जियो-टैगिंग पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने लाभार्थी के आवास के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना है कि यदि पहले से दो मंजिला पक्का मकान मौजूद था तो योजना का लाभ देने से पहले किए गए भौतिक सत्यापन और जियो-टैगिंग की प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए।
हालांकि, किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत को लेकर अभी तक कोई अंतिम प्रशासनिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इस बिंदु पर भी अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार करना आवश्यक है।
चनुसाह ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों पर भी रखी बात
उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित वास्तविक स्थिति उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों एवं साक्ष्यों से स्पष्ट की जा सकती है।
चनुसाह का यह भी कहना है कि बिरजू ठाकुर की ओर से उनके खिलाफ समय-समय पर विभिन्न प्रकार के आरोप एवं उत्पीड़न किए जाने का उन्हें सामना करना पड़ा है। चनुसाह के अनुसार, इन मामलों से संबंधित दस्तावेज एवं साक्ष्य उनके पास उपलब्ध हैं और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर के प्रकाशन तक नहीं हो सकी है। इसलिए चनुसाह द्वारा लगाए गए आरोपों को उनके कथन के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।
अनुमंडल पदाधिकारी ने जांच को बताया जारी प्रक्रिया
मामले को लेकर वर्तमान अनुमंडल पदाधिकारी से हुई बातचीत में प्रशासनिक स्तर से स्पष्ट किया गया कि जांच प्रक्रिया अभी चल रही है।
अधिकारी के अनुसार, मामले की जांच नियमानुसार कराई जाएगी। यदि जांच में सरकारी राशि का दुरुपयोग अथवा योजना का लाभ गलत तरीके से लेने की बात प्रमाणित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक स्तर से यह भी स्पष्ट किया गया कि सरकार की योजनाओं का पैसा वास्तविक जरूरतमंद और पात्र लोगों तक पहुंचना चाहिए। जांच रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी योजना का लाभ वास्तविक हकदार तक पहुंचे—यही प्रशासन की प्राथमिकता
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का उद्देश्य जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को आवास उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि किसी अपात्र व्यक्ति द्वारा गलत तरीके से योजना का लाभ लेना जांच में प्रमाणित होता है तो यह सरकारी राशि के साथ-साथ योजना की निगरानी और लाभार्थी चयन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़ा करेगा।
इसी वजह से इस मामले में प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्ष पर लोगों की नजर बनी हुई है।
विपक्षी पक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस मामले में लाभार्थी अमिता कुमारी एवं बिरजू ठाकुर की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई स्वतंत्र प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
इसी तरह किसी कर्मचारी अथवा अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर भी अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच के बाद ही सामने आएगा।
अब अंतिम फैसला जांच रिपोर्ट पर
लोक शिकायत की कार्यवाही आदेश के साथ समाप्त कर दी गई है, लेकिन आदेश में मधुबन BDO को आगे विधिवत जांच कर कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि लाभार्थी योजना के लिए अपात्र होते हुए अथवा तथ्य छिपाकर PMAY-G का लाभ प्राप्त कर चुकी हैं, तो आदेश के अनुसार सरकारी राशि की रिकवरी और प्राथमिकी की कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल मामला केवल आरोप तक सीमित नहीं है। शिकायत के बाद जांच हुई, जांच रिपोर्ट में दो मंजिला मकान का उल्लेख आया और अब लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने आगे की विधिवत जांच एवं कार्रवाई का निर्देश दिया है।
अब सबकी निगाह मधुबन प्रखंड की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यही रिपोर्ट तय करेगी कि सरकारी राशि की रिकवरी होगी या नहीं और क्या मामले में प्राथमिकी की कार्रवाई तक बात पहुंचेगी।
