सहस्त्र चंडी महायज्ञ के छठवें दिन मां धूमावती का विशेष पूजन-अनुष्ठान , धर्म एवं आध्यात्मिक चेतना के संरक्षण और संवर्धन का महत्वपूर्ण आयोजन ।

सहस्त्र चंडी महायज्ञ के छठवें दिन मां धूमावती का विशेष पूजन-अनुष्ठान , धर्म एवं आध्यात्मिक चेतना के संरक्षण और संवर्धन का महत्वपूर्ण आयोजन ।
जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज का मार्गदर्शन एवं सानिध्य प्राप्त
प्रतिदिन विभिन्न देवी-देवताओं का पूजन, यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न
रामकुमार यादव प्राइम इंडिया न्यूज संवाददाता गुरूग्राम ।
गुरुग्राम। जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में आयोजित महायज्ञ सनातन वैदिक परंपरा, धर्म एवं आध्यात्मिक चेतना के संरक्षण और संवर्धन का महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। महायज्ञ में प्रतिदिन विभिन्न देवी-देवताओं का पूजन, यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान विधिवत संपन्न हो रहे हैं। देश के विभिन्न क्षेत्रों से संत-महात्मा एवं श्रद्धालु इसमें सहभागिता कर रहे हैं। मां धूमावती के विशेष पूजन के दौरान यज्ञ स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला। उपस्थित संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता करते हुए मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह जानकारी संस्थान के प्रवक्ता के द्वारा मीडिया से सांझा की गई।
पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के मार्गदर्शन एवं सानिध्य में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ पूजन के छठवें दिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में विभिन्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न हुए। सुप्रभात बेला से ही यज्ञ परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन का क्रम प्रारंभ हुआ।
सर्वप्रथम निर्धारित विधि के अनुसार वेदी पूजन एवं सभी स्तंभों का पूजन संपन्न कराया गया। इसके उपरांत महायज्ञ में मां धूमावती का विशेष पूजन-अनुष्ठान विधि-विधान एवं वैदिक परंपराओं के अनुसार किया गया।
यज्ञाचार्य तेजमणि तिवारी की देखरेख में आचार्यों एवं विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। मंत्रोच्चार, हवन एवं पूजन से पूरा यज्ञ परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया। इस अवसर पर मिथिलेश दीक्षित, लखनऊ, डॉ. विनय मिश्रा सपत्नीक, बाबूलाल मुवडा, जयगांव (भूटान), सच्चिदानंद तिवारी, बृजभूषानंद सरस्वती, रामलखन दास नागा सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। महायज्ञ के आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक एवं वैदिक अनुष्ठान निर्धारित विधि-विधान के अनुसार संपन्न होंगे।
