नन्ही की हिम्मत और इंसानियत की मिसाल — सुभाष रोड,गांधी नगर मार्किट ।

नन्ही की हिम्मत और इंसानियत की मिसाल — सुभाष रोड,गांधी नगर मार्किट ।
çएटा (डुमरी) की रहने वाली नन्ही घरेलू हिंसा की पीड़ा झेलने के बावजूद अपने परिवार का जीवन संभालने , बच्चों को पालने और आत्मनिर्भर बनने का निर्णय लेकर घर से निकलीं। न मकान है न आय का साधन, पति कोई जिम्मेदारी नहीं उठाता बल्कि दुर्व्यवहारा करता है , पर नन्ही ने हिम्मत की और पड़ोस से उधार लेकर वह दिल्ली के गांधी नगर स्थित सुभाष रोड मार्केट पहुँचीं, ताकि कुछ सामान खरीदकर अपना घर-परिवार चला सकें।
सुबह-सुबह 7 बजे मार्केट पूरी खुली नहीं थी कुछ दुकानें ही खुली थी नन्ही ने एक दुकान से खरीदारी की, इसके बाद अगली दुकान पर कुछ सामान खरीदा और सारा सामान वहीं रख दिया, यह सोचकर कि आगे की दुकानों से खरीदारी करने के बाद सारा सामान एक साथ उठा लेंगी।
लेकिन जब कुछ देर बाद पूरी मार्केट खुली और नन्ही वापस अपना सामान लेने पहुँचीं, तो उन्हें याद ही नहीं रहा कि सामान किस दुकान पर रखा था। अजनबी शहर, जेब में पैसे नहीं और अब तो सामान भी कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।
स्थिति बेहद कठिन थी, लेकिन नन्ही ने हिम्मत नहीं हारी।
वह पूरी मार्केट में रोते रोते वो दुकान और अपना सामान को ढूँढती रहीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात मनोज उपाध्याय, संजय शर्मा और प्रशांत तिवारी से हुई। तीनों ने नन्ही की परेशानी को समझा और उनकी मदद के लिए आगे आए परंतु सामान का पता नहीं चला, स्थानीय पुलिस प्रशासन से संपर्क कर और प्रयास किए गए, लेकिन उस दिन सामान का पता नहीं चल पाया। नन्ही के पास रात में ठहरने की भी व्यवस्था नहीं थी, इसलिए उनकी रात में रुकने की व्यवस्था की गई।
इस पूरे मामले की जानकारी प्रशांत तिवारी ने एटा से भाजपा सांसद प्रत्याशी रहे श्री राजवीर सिंह जी को दी गई, उन्होंने भी नन्ही की हरसंभव मदद का आश्वासन दिया और इस मानवीय पहल को सराहा।
वहीं गांधी नगर थाना अध्यक्ष श्री राज कुमार जी और उनकी टीम, विशेष रूप से विकास यादव जी, वीरेंद्र सिंह जी व अन्य सहयोगियों, ने इस मामले में मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए लगातार प्रयास जारी रखे।
आज सुबह 7 बजे नन्ही को उन्हीं गलियों और दुकानों में दोबारा ले जाया गया, जहाँ उन्होंने पिछली सुबह खरीदारी की थी।
और आखिरकार मेहनत रंग लाई।
नन्ही का बैग और उसका खरीदा हुआ सामान मिल गया, दुकानदार ने सम्भाल कर रखा था और इंतजार कर रहा था नन्ही के लौटकर आने का।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
गांधी नगर के व्यापारियों मनोज उपाध्याय, संजय शर्मा, प्रशांत गोयल, गोविंद सिंघल, दीपक गुप्ता, अंकुर छतवाल, अंकित गुप्ता, ओम प्रकाश, संजय सक्सेना आदि ने मिलकर प्रशांत तिवारी की अगुवाई में नन्ही को उसके खरीदे हुए सामान के साथ-साथ भेंट स्वरूप भी अतिरिक्त सामान दिया, क्योंकि 2 महीने के बाद नन्ही की बेटी की शादी होनी है और वह अपने घर जाकर अपने जीवन और परिवार का पालन-पोषण कर सके।
दो दिनों तक दिल्ली जैसे अनजान शहर में परेशान रहने वाली नन्ही को आखिरकार थाना अध्यक्ष श्री राज कुमार जी की बड़े भाई की तरह सभी के साथ मिलकर नन्ही को सुरक्षित रूप से उनके शहर वापस जाने वाली बस में बैठाकर विदा किया गया।
यह सिर्फ खोए हुए सामान के मिलने की कहानी नहीं है।
यह कहानी है एक महिला की हिम्मत की,
उन लोगों की मानवता की,
व्यापारियों की सहृदयता की,
और पुलिस प्रशासन की संवेदनशील भूमिका की।
नन्ही ने हार नहीं मानी, और इंसानियत ने भी उसका साथ नहीं छोड़ा।
ऐसी घटनाएँ हमें याद दिलाती हैं कि मुश्किल समय में अगर इंसान इंसान के साथ खड़ा हो जाए, तो बड़ी से बड़ी परेशानी भी छोटी पड़ जाती है।
इंसानियत जिंदा है। ❤️
