पाकिस्तान ने तोड़ा 125 पुराना मंदिर , अब सहारनपुर मस्जिद पर दिया ज्ञान ।

पाकिस्तान जो दुनिया की भीख पर पलता है और जिसने कभी भी धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों की आजादी की परवाह नहीं की वो उस भारत को ज्ञान दे रहा है जहां हर धर्म का सम्मान होता है और जहां की अल्पसंख्यक आबादी काफी तेजी से बढ़ रही है। भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने और धार्मिक सहिष्णुता पर प्रवचन देने की पाकिस्तान की पुरानी आदत रही है। अब इस्लामाबाद ने उत्तर प्रदेश में एक पुरानी मस्जिद के ढांचे को हटाए जाने पर मगरमच्छ के आंसू बहाए हैं। लेकिन जब खुद के गिरेबान में झांकने की बारी आई तो पाकिस्तान का अल्पसंख्यक विरोधी और कट्टरपंथी चेहरा बेपर्दा हो गया।
पाकिस्तान ने पिछले हफ्ते पंजाब में 125 साल पुराने हिंदू मंदिर को ढहा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर तोड़कर अब वहां मदरसा बनाया जाएगा। लेकिन पाकिस्तान ने जो मंदिर तोड़ने के पीछे बारिश का बहाना बनाया है। उसने दलील दी है कि बारिश की वजह से मंदिर का एक हिस्सा टूट गया था इसीलिए मंदिर को पूरा तोड़ दिया गया। जबकि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की वकालत करने वाले समूह ‘पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी’ ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
इसने कहा है कि नारोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित मंदिर को 21 अगस्त को गिरा दिया गया था। ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक संगठन ने दावा किया कि पास के ही एक मदरसे के विस्तार के लिए जगह बनाने के मकसद से इस ढांचे को जान-बूझकर तोड़ा गया था। ‘डॉन’ में छपी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने स्पष्टीकरण जारी किया कि मंदिर बारिश में ढह गया था उसे तोड़ा नहीं गया था। बयान में कहा गया मंदिर से सटी जमीन एक मदरसा को लीज पर दी गई थी लेकिन मंदिर की अपनी जमीन कभी किसी को लीज पर नहीं दी गई थी।
