दर्दनाक। बहुत दर्दनाक मृत्यु का सामना करना पड़ा था इन्हें भी। संजयजोग नाम है इनका। और हम सभी इन्हें बहुत अच्छी तरह से जानते-पहचानते हैं।

*दर्दनाक। बहुत दर्दनाक मृत्यु का सामना करना पड़ा था इन्हें भी। संजय जोग नाम है इनका। और हम सभी इन्हें बहुत अच्छी तरह से जानते-पहचानते हैं। ये मुमकिन ही नहीं है कि किसी ने रामायण देखी हो और वो इन्हें ना जानता हो।*
रामानंद सागर की रामायण में भरत का किरदार निभाया था संजय जोग ने। और सभी इस बात से वाकिफ़ हैं कि संजय जोग ने भरत के किरदार को अपने शानदार अभिनय से जीवंत कर दिया था।
संजय जोग 80 और 90 के दशक में टीवी जगत का चर्चित नाम हुआ करते थे। यूं तो संजय जोग एयरफोर्स पायलट बनना चाहते थे। लेकिन किस्मत उन्हें ले आई अभिनय की तरफ।
हालांकि जब संजय जोग जी ने एक्टर बनने की ख्वाहिश अपने घर पर बताई थी तो इनके माता-पिता ने काफी नाराज़गी जताई थी। उस वक्त वो कहां जानते थे कि उनका बेटा एक दिन एक ऐसा किरदार निभाएगा जो उसे भारत के घर-घर में लोकप्रिय कर देगा। लोग उनके बेटे को सम्मान की नज़रों से देखेंगे।
वैसे संजय जोग जी ने कुछ हिंदी, मराठी व गुजराती फिल्मों में भी काम किया था। इनकी पहली हिंदी फिल्म 1991 में आई जिगरवाला बताई जाती है। लेकिन ये सच नहीं है।
संजय जोग ने पहली दफा 1989 में आई घबराहट नाम की एक हॉरर फिल्म में एक्टिंग की थी। उसके बाद संजय जोग ने जिगरवाला में काम किया था। फिर ये दिखे नसीबवाला(1992), हमशकल(1992), इंसान बना शैतान(1992) और बेटा हो तो ऐसा(1994) जैसी फिल्मों में।
संजय जोग ने पहली दफा सापला नाम की एक मराठी फिल्म में काम किया था। संजय जी को उस फिल्म से काफी उम्मीदें थी। लेकिन वो फिल्म फ्लॉप हो गई। संजय जी इतने निराश हुए की अपने होम टाउन नागपुर वापस लौट आए और खेती करने लगे।
खेती के काम से ही संजय जोग जी कुछ महीनों बाद मुंबई दोबारा गए थे। वहां उन्हें फिर से एक मराठी फिल्म ऑफर की गई। संजय जोग को उस फिल्म की कहानी पसंद आई और उन्होंने काम करने के लिए हामी भर दी। वो फिल्म सुपरहिट साबित हुई।
और यहीं से संजय जोग दोबारा एक्टिंग की दुनिया में लौट आए। बताया ये भी जाता है कि पहले संजय जोग जी को रामायण में लक्ष्मण का किरदार ऑफर हुआ था।
लेकिन उस वक्त वो रामायण में काम नहीं करना चाहते थे। और वो इसलिए क्योंकि उन दिनों ये गुजराती फिल्मों में काफी बिज़ी थे। मगर जब इन्हें पता चला कि रामायण बहुत बड़े स्केल पर बन रही है तो उन्होंने रामानंद सागर से दोबारा संपर्क किया।
इस वक्त तक लक्ष्मण का रोल तो नहीं बचा था। रामानंद सागर ने इन्हें भरत के रोल के लिए कास्ट कर लिया। वैसे रामानंद सागर से संजय जोग की मुलाकात गोपाल दादा ने कराई थी। गोपाल दादा एक मेकअप आर्टिस्ट थे।
और जब गुजराती फिल्म माया बाज़ार में संजय जोग अभिमन्यू का किरदार निभा रहे थे, तब उनके मेकअप की ज़िम्मेदारी गोपाल दादा पर ही थी। इत्तेफाक से गोपाल दादा को ही रामायण के मेकअप डिपार्टमेंट को संभालने का ज़िम्मा भी मिला था।
आज संजय जोग जी का जन्मदिवस है। 24 सितंबर 1955 को संजय जोग का जन्म हुआ था। जबकी 27 नवंबर 1995 को मात्र 40 वर्ष की आयु में लीवर फेल होने की वजह से संजय जोग का निधन हो गया था।
संजय जोग जी का असमय जाना उनके फैंस के लिए दिल तोड़ देने वाली घटना थी। किस्सा टीवी संजय जोग को ससम्मान याद करते हुए नमन करता है। शत शत नमन।
