August 11, 2026

दिल्ली की CM महिला, फिर भी महिला की FIR के लिए तरस रहा इंसाफ

दिल्ली की CM महिला, फिर भी महिला की FIR के लिए तरस रहा इंसाफ

दिल्ली की CM महिला, फिर भी महिला की FIR के लिए तरस रहा इंसाफ !

PCR कॉल, MLC और वीडियो सबूत होने का दावा—गाजीपुर थाने में FIR क्यों नहीं? CM रेखा गुप्ता के महिला सुरक्षा के दावों पर बड़ा सवाल

राजधानी दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पूर्वी दिल्ली के थाना गाजीपुर क्षेत्र से सामने आया एक मामला उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आशीर्वाद अपार्टमेंट में 22 जुलाई को पार्किंग विवाद के दौरान एक महिला के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आया है। पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद 112 पर PCR कॉल हुई, पुलिस मौके पर पहुंची, MLC कराया गया और वीडियो साक्ष्य भी पुलिस को उपलब्ध कराया गया—इसके बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं हुई।

मामले को लेकर पीड़िता की ओर से 29 जुलाई को X के माध्यम से दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने की बात कही गई है। इसके बावजूद FIR दर्ज न होने का आरोप पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सबसे बड़ा सवाल—जब PCR रिकॉर्ड, MLC और वीडियो साक्ष्य मौजूद होने का दावा है, तो FIR आखिर क्यों नहीं?

दिल्ली की मुख्यमंत्री स्वयं एक महिला हैं। ऐसे में महिला सुरक्षा को लेकर सरकार के दावों के बीच यह मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या किसी महिला को न्याय दिलाने के लिए पहले सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा और मारपीट का वीडियो वायरल करना जरूरी है?

मुख्यमंत्री और सरकार द्वारा महिला सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले दावों के बीच अब सवाल यह है कि जमीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा और शिकायतों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

पीड़िता का आरोप है कि उसके बयान लिए गए, मेडिकल कराया गया और पुलिस को वीडियो भी दिया गया, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई। वहीं मामले में पुलिस पर गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।

क्या महिला सुरक्षा सिर्फ मंचों से दिए जाने वाले भाषणों तक सीमित है?

क्या ‘नारी शक्ति’ का सम्मान तभी होगा, जब पीड़िता की आवाज सोशल मीडिया पर वायरल हो?

यह मामला किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि एक महिला के कथित उत्पीड़न और उसके न्याय के अधिकार का सवाल है। यदि पीड़िता के आरोप सही हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो पुलिस को जांच के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

अब निगाहें दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं।

पीड़िता को भाषण नहीं, न्याय चाहिए।

दावे नहीं, कार्रवाई चाहिए।

और सबसे बड़ा सवाल—जब सबूत सामने होने का दावा है, तो FIR कब होगी?

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