“दिल्ली में साइकिल के नाम पर खेल! ₹3,000 प्रति साइकिल का हिसाब दो—AAP का सरकार पर सीधा हमला

“₹7,000 की साइकिल या ₹4,000 का सच? विधानसभा में ‘लूट का पहिया’ घुमा AAP ने खोला बड़ा राज!”
“दिल्ली में साइकिल के नाम पर खेल! ₹3,000 प्रति साइकिल का हिसाब दो—AAP का सरकार पर सीधा हमला
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा आज सिर्फ बहस का मंच नहीं रही, बल्कि सीधे-सीधे टकराव का मैदान बन गई, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने साइकिल लेकर सदन में एंट्री की और भाजपा सरकार पर ऐसा हमला बोला जिसने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए। यह कोई साधारण विरोध नहीं था—यह सीधा आरोप था, सीधा चुनौती थी और सीधे जनता के पैसों का हिसाब मांगने का ऐलान था।
AAP नेताओं ने सदन के अंदर साइकिल चलाकर दिखाया कि जो साइकिल भाजपा सरकार ₹7,000 में खरीद रही है, वही साइकिल वे ₹4,000 में खरीदकर लेकर आए हैं। उनका दावा था कि दोनों साइकिलों में कोई फर्क नहीं—ना डिजाइन में, ना फीचर्स में, ना क्वालिटी में। फर्क अगर है तो सिर्फ कीमत का, और वही कीमत अब सबसे बड़ा सवाल बन गई है।
यहीं से मामला गर्माया और सियासत में तूफान खड़ा हो गया।
AAP ने खुलकर आरोप लगाया कि हर साइकिल पर ₹3,000 का खेल किया गया है। अगर बड़ी संख्या में साइकिल खरीदी गई हैं, तो यह मामला सीधे करोड़ों की रकम तक पहुंच सकता है। पार्टी ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार और मंत्री आशीष सूद को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह सिर्फ खरीद नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई पर सीधा वार है।
विधानसभा के अंदर साइकिल चलाने का यह कदम अब प्रतीक बन चुका है—एक तरफ सरकार की खरीद प्रक्रिया, दूसरी तरफ विपक्ष का खुला आरोप। यह टकराव अब सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिल्ली की सड़कों और जनता की चर्चा का केंद्र बन गया है।
सबसे बड़ा सवाल अब सीधे-सीधे सरकार के सामने खड़ा है—
क्या ₹7,000 की साइकिल वाकई सही कीमत पर खरीदी गई?
अगर वही साइकिल ₹4,000 में मिल रही है, तो बाकी ₹3,000 कहां गए?
क्या टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी थी या इसमें कहीं बड़ा खेल छिपा हुआ है?
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी खरीद और जवाबदेही पर बहस को तेज कर दिया है। AAP इसे “साइकिल घोटाला” बता रही है और जांच की मांग कर रही है, जबकि सरकार पर अब दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह इन आरोपों पर खुलकर जवाब दे।
दिल्ली0 की सियासत में आज साइकिल सिर्फ एक साधन नहीं रही—
यह अब सवाल बन चुकी है, जवाब बन चुकी है और सबसे बढ़कर एक ऐसा मुद्दा बन चुकी है जो आने वाले दिनों में राजनीतिक तापमान को और बढ़ाने वाला है।
