मौत दबे पांव आई और निर्मल को अपने पंजों में दबाकर ले गई। यकीन कर पाना ।

मौत दबे पांव आई और निर्मल को अपने पंजों में दबाकर ले गई। यकीन कर पाना मुश्किल था कि निर्मल पांडे इस दुनिया में नहीं रहे। मगर कब तक यकीन नहीं कर पाता कोई? मौत से तो इन्कार किया ही नहीं जा सकता।
फिल्मी दुनिया के आकाश में एक से बढ़कर एक सितारे हुए हैं। निर्मल पांडे भी उनमें से एक थे। आज निर्मल पांडे जी का जन्मदिवस है। इसलिए किस्सा टीवी आज निर्मल पांडे जी की कहानी आप पाठकों को बताएगा। निर्मल पांडे जी के बारे में काफी कुछ आज हम और आप जानेंगे।
10 अगस्त 1962 को नैनीताल में निर्मल पांडे का जन्म हुआ था। उनका असली नाम था राजकुमार पांडे। निर्मल उनका फिल्मी नाम था। फिलहाल हम उनके फिल्मी नाम से ही उनके बारे में बात करेंगे। निर्मल जी के पिता हरीश चंद्र पाड्ये एक क्लर्क थे।
निर्मल जी की मां रीवा पांडे एक हाउसवाइफ थी। उनके दो भाई और तीन बहनें थी। निर्मल पांडे को एक्टिंग की दुनिया में आने के लिए प्रेरित किया रामलीला ने। बचपन से ही ये अपने यहां होने वाली रामलीला में हिस्सा लेते थे और कोई ना कोई किरदार निभाते थे।
दरअसल, निर्मल पांडे जी के नाना अपने इलाके में रामलीला का आयोजन कराते थे। इसलिए निर्मल पांडे को आसानी से रामलीला में छोटी उम्र से ही अभिनय करने का मौका मिल गया था।
रामलीला में अभिनय करते-करते ही निर्मल पांडे जी ने बड़े होकर एक्टर बनने का फैसला किया था। बचपन में शुरु हुआ अभिनय का वो सिलसिला सिर्फ रामलीला तक ही सीमित नहीं था। स्कूल में भी निर्मल पांडे ड्रामों में हिस्सा लेते थे। और जब कॉलेज में आए तो और गंभीर होकर उन्होंने ड्रामा करने शुरू कर दिए।
एम.कॉम कंप्लीट करने के बाद निर्मल पांडे ने एक सरकारी विभाग में सीनियर अकाउंटेंट की नौकरी शुरू कर दी। लेकिन बनना तो इन्हें एक्टर था। इसलिए कुछ ही महीनों में वो उस नौकरी से ऊब गए।
हालांकि नाटकों में काम वो अब भी करते थे। बचपन से ही निर्मल पांडे फिल्मों में काम करने का ख्वाब देखते थे। अपने उस ख्वाब को पूरा करने के लिए निर्मल पांडे ने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली यानि एनएसडी में दाखिला लेने का फैसला किया।
साल 1986 में निर्मल पांडे जी को एनएसडी में दाखिला भी मिल गया। एनएसडी का कोर्स पूरा करने के बाद निर्मल पांडे ने तारा आर्ट ग्रुप नाम का लंदन का एक थिएटर ग्रुप जॉइन कर लिया। और वो लंदन चले गए।
लंदन में उन्होंने कई नाटकों में अभिनय किया। उस दौरान निर्मल पांडे का सबसे खास नाटक था हीर रांझा। निर्मल और उनके ग्रुप ने चालीस से ज़्यादा देशों में उस नाटक का मंचन किया था।
जब शेखर कपूर अपनी फिल्म बैंडिट क्वीन के लिए एक्टर्स की तलाश कर रहे थे तब वो एनएसडी आए थे। एनएसडी से उन्होंने कई एक्टर्स को लिया था। वहीं पर शेखर कपूर को निर्मल पांडे के बारे में पता चला।
उन्होंने जब निर्मल की तस्वीरें देखी तो वो उनके लुक्स से बहुत प्रभावित हुए। शेखर कपूर ने निर्मल पांडे से संपर्क किया और उन्हें बैंडिट क्वीन में विक्रम मल्लाह का रोल ऑफर कर दिया। जबकी पहले यही रोल शेखर कपूर ने मनोज बाजपेयी को ऑफर किया था।
निर्मल को जब फिल्म मिली तो वो लंदन से भारत लौट आए। साल 1994 में बैंडिट क्वीन रिलीज़ हुई। निर्मल के अभिनय की हर किसी ने भर-भरकर तारीफ की। निर्मल की दूसरी फिल्म रही 1996 में आई इस रात की सुबह नहीं।
इसी साल निर्मल एक और फिल्म में नज़र आए थे जिसके लिए इन्हें एक बार फिर से खूब सराहा गया था। वो फिल्म थी दायरा जिसे अमोल पालेकर ने बनाया था। फ्रांस के प्रतिष्ठित वैनोसिएन फिल्म फेस्टिवल में निर्मल पांडे को दायरा फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर अवॉर्ड दिया गया था।
आगे चलकर निर्मल पांडे ने कई फिल्मों में काम किया जैसे औजार, कोई बच ना पाए, ट्रेन टू पाकिस्तान, प्यार किया तो डरना क्या, जहां तुम ले चलो, गॉडमदर, हम तुम पे मरते हैं, हद कर दी आपने, शिकारी, दुबई, वन टू का फोर, दीवानगी, आंच, पथ, लैला, देशद्रोही व मुद्रांक।
इनमें से अधिकतर फिल्मों में निर्मल पांडे विलेनियस किरदारों में दिखे थे। निर्मल पांडे ने टीवी पर भी काफी काम किया था। 2003 में स्टार प्लस पर आए शो हातिम में निर्मल पांडे ने दज्जाल का कैरेक्टर प्ले किया था। और वो कैरेक्टर तब बहुत मशहूर हुआ था।
निर्मल ने सोन परी, प्रिंसेस डॉली और उसका मैजिक बैग, लकी, श्श्श्श्श फिर कोई है व राजकुमार आर्यन जैसे टीवी शोज़ में काम किया था। निर्मल पांडे गायकी भी करते थे। उन्होंने कुछ म्यूज़िक वीडियोज़ व एक एल्बम भी रिलीज़ किए थे। और उन सभी में गायकी उन्होंने ही की थी।
निर्मल पांडे के निजी जीवन की तरफ रुख करें तो पता चलता है कि उनकी दो शादियां हुई थी। उन्होंने पहली शादी की थी गीतकार व स्क्रीनराइटर कौशर मुनीर से। ये शादी साल 1997 में हुई थी। दोनों की एक बेटी भी हुई।
लेकिन तीन साल बाद ही, यानि 2000 में कौशर मुनीर से उनका तलाक हो गया। जहां कौशर मुनीर ने राहुल पंडिता से दूसरी शादी कर ली। तो वहीं निर्मल पांडे ने भी अर्चना शर्मा नामक एक महिला से शादी कर ली जो नैनीताल के एक स्कूल में प्रधानाचार्या थी।
उन दोनों के भी दो बच्चे हुए थे। कहा जाता है कि अर्चना शर्मा संग भी निर्मल पांडे के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रह गए थे। दोनों अलग रहने लगे थे। मगर दोनों का तलाक नहीं हुआ था।
इस वक्त तक निर्मल का फिल्मी करियर भी बहुत अच्छा नहीं रह गया था। उन्हें फिल्मों में बहुत अच्छे रोल नहीं मिल रहे थे। मजबूरी में उन्होंने कुछ ऐसी फिल्मों में काम किया जो उनके जैसे अभिनेता के लिए नहीं थी। इन सब बातों ने निर्मल पांडे को दुखी कर दिया था। वो डिप्रेशन में आ गए थे।
एक तरफ तो निर्मल पांडे का करियर कुछ खास नहीं चल रहा था। दूसरी तरफ उनके निजी जीवन में भी कोई सुख नहीं बचा था। इन सब बातों की वजह से निर्मल पांडे बहुत परेशान रहने लगे थे। जीवन की उन्हीं परेशानियों से जूझते हुए ही 18 फरवरी 2010 को हार्ट अटैक की वजह से निर्मल पांडे जी की मृत्युू हो गई।
उनकी मृत्यु के बाद उनकी आखिरी फिल्म लाहौर रिलीज़ हुई थी। उस फिल्म में निर्मल पांडे जी ने एक भले पाकिस्तानी व्यक्ति का किरदार निभाया था। किस्सा टीवी निर्मल पांडे जी को नमन करता है ।
