सत्य निकेतन हादसे ने खोली भवन सुरक्षा की पोल, अब लापरवाही पर कार्रवाई का कड़ा संदेश—जिम्मेदारी से खिलवाड़ पड़ा भारी ।

मौतों के बाद जागा MCD! DC समेत 5 अफसर निलंबित
सत्य निकेतन हादसे ने खोली भवन सुरक्षा की पोल, अब लापरवाही पर कार्रवाई का कड़ा संदेश—जिम्मेदारी से खिलवाड़ पड़ा भारी
प्राइम इंडिया न्यूज संवाददाता अजीत कुमार दिल्ली ।
नई दिल्ली। सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद निगम की भवन सुरक्षा व्यवस्था और अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सत्य निकेतन हादसे ने यह सवाल सामने ला दिया है कि जिन अधिकारियों के जिम्मे इमारतों की निगरानी, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और संभावित खतरनाक निर्माण को रोकने की जिम्मेदारी है, वहां समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती। हादसा होने के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई करना जरूरी है, लेकिन उससे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी इमारत में पहले से खतरे के संकेत मौजूद थे तो उन्हें हादसे से पहले क्यों नहीं पहचाना गया।
सैदुलाजाब समेत पूर्व में सामने आए हादसों और उनसे जुड़ी जांचों को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं। यदि पूर्व की किसी जांच में अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे, तो उन मामलों में समय रहते क्या कार्रवाई की गई, इसकी भी निष्पक्ष समीक्षा की जरूरत है। हालांकि इन मामलों में किसी अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को अंतिम रूप से जांच और आधिकारिक निष्कर्ष के आधार पर ही तय किया जाना चाहिए।
वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नाराजगी के बाद कार्रवाई किए जाने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं, लेकिन इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। ऐसे में अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निलंबन की कार्रवाई केवल तत्काल प्रतिक्रिया बनकर न रह जाए, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और जहां भी लापरवाही साबित हो वहां नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के भवन विभाग के लिए यह बड़ा सबक है कि किसी भी संभावित खतरनाक निर्माण को नजरअंदाज करना भविष्य में भारी पड़ सकता है। अधिकारियों को यह समझना होगा कि निरीक्षण की एक रिपोर्ट, जारी किया गया नोटिस या की गई कार्रवाई महज सरकारी कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उसके पीछे लोगों की जिंदगी और परिवारों की सुरक्षा जुड़ी होती है। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन दिखाई देता है और अधिकारी समय रहते कार्रवाई नहीं करते, तो जांच के दौरान उनकी जवाबदेही तय होना स्वाभाविक है।
मासूमों की मौत के बाद हुई यह कार्रवाई कम से कम इतना संदेश जरूर देती है कि सरकारी जिम्मेदारी में लापरवाही को हमेशा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब दिल्ली की जनता की नजर इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और जिम्मेदारी किस स्तर तक तय की जाती है। क्योंकि किसी हादसे के बाद मुआवजा और निलंबन से ज्यादा जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि अगली बार किसी परिवार को अपने किसी सदस्य की जान गंवाने का दर्द न झेलना पड़े। अफसरों के लिए अब सबसे बड़ा संदेश यही होना चाहिए कि जिम्मेदारी की कुर्सी सम्मान के साथ-साथ जवाबदेही भी मांगती है और लापरवाही साबित होने पर कार्रवाई हादसे के बाद नहीं, उससे पहले होनी चाहिए।
