September 9, 2026

न्यू अशोक नगर में नियमों से ऊपर उठती इमारतें, लेकिन जिम्मेदारों की नजरें आखिर नीचे क्यों?

न्यू अशोक नगर में नियमों से ऊपर उठती इमारतें, लेकिन जिम्मेदारों की नजरें आखिर नीचे क्यों?

न्यू अशोक नगर में नियमों से ऊपर उठती इमारतें, लेकिन जिम्मेदारों की नजरें आखिर नीचे क्यों?

चार मंजिल से ऊपर धड़ल्ले से खड़े हो रहे निर्माणों ने खोली MCD-DDA की निगरानी व्यवस्था की पोल, क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा?

प्राइम इंडिया न्यूज संवाददाता अजीत कुमार दिल्ली ।

नई दिल्ली। न्यू अशोक नगर में तेजी से बढ़ता बहुमंजिला निर्माण अब महज भवन निर्माण नियमों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की सुरक्षा और शासन-प्रशासन की जवाबदेही से जुड़ा बेहद गंभीर सवाल बन चुका है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इलाके के कई ब्लॉकों में चार मंजिल से भी ऊपर इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। ऐसे में सवाल सीधा है कि यदि ये निर्माण स्वीकृत नक्शे, निर्धारित ऊंचाई और भवन मानकों के अनुरूप हैं तो उनकी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं की जाती और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित विभागों की कार्रवाई आखिर कहां है?

सबसे चिंताजनक बात यह है कि किसी इमारत की एक-दो मंजिल रातोंरात नहीं बनती। निर्माण शुरू होता है, नींव पड़ती है, मंजिल दर मंजिल ढांचा खड़ा होता है और आसपास के लोग सब कुछ अपनी आंखों से देखते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि MCD-DDA की निगरानी व्यवस्था किस स्तर पर काम कर रही है? क्या विभागीय निरीक्षण समय पर हुआ? क्या स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण का मिलान किया गया? अगर नहीं किया गया तो इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?

न्यू अशोक नगर में कथित अनधिकृत निर्माण का मामला पहले भी न्यायालय तक पहुंच चुका है। सितंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष ई-ब्लॉक की एक संपत्ति में कथित अनधिकृत निर्माण से जुड़ा मामला आया था। रिपोर्ट के अनुसार चौथी मंजिल पर आंशिक कार्रवाई किए जाने और आगे कार्रवाई की बात अदालत के सामने रखी गई थी। ऐसे न्यायिक संदर्भ के बाद यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या सिर्फ एक-दो मामलों में कार्रवाई करके जिम्मेदारी पूरी हो जाती है या पूरे इलाके में नियमों के अनुरूप निर्माण की व्यापक जांच जरूरी है?

यहां किसी अधिकारी, कर्मचारी या जनप्रतिनिधि पर बिना जांच मिलीभगत का आरोप लगाना उचित नहीं होगा, लेकिन लापरवाही हुई है या नहीं, यह पता लगाने की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की ही है। यदि किसी भवन का निर्माण निर्धारित मानकों से अधिक हुआ है तो निर्माण के शुरुआती चरण में उसे रोकने की व्यवस्था क्यों नहीं चली? और अगर विभाग ने समय रहते नोटिस दिया था तो उसके बाद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

स्थानीय लोगों की मांग है कि न्यू अशोक नगर के सभी ब्लॉकों में विशेष अभियान चलाकर बहुमंजिला इमारतों का भौतिक सर्वे कराया जाए। हर संदिग्ध भवन के स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण की जांच हो, भवन की ऊंचाई, अतिरिक्त मंजिल, पार्किंग, अग्नि एवं अन्य सुरक्षा मानकों की जांच की जाए और जहां नियमों का गंभीर उल्लंघन मिले वहां कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

यह सवाल किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, पूरी व्यवस्था के सामने है। अगर नियम आम नागरिक के लिए हैं तो बड़े निर्माणों पर भी उतने ही लागू होने चाहिए। शासन-प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्रवाई शिकायत आने या हादसा होने के बाद नहीं, बल्कि नियम टूटते ही हो।

अब सवाल सिर्फ इतना नहीं कि चार मंजिल से ऊपर बनी इमारतों पर कार्रवाई कब होगी; असली सवाल यह है कि ऐसी इमारतें चार मंजिल तक पहुंचीं ही कैसे?

न्यू अशोक नगर की जनता जवाब चाहती है MCD और DDA बताए कि इलाके में कितने भवन स्वीकृत नक्शे के अनुसार बने हैं, कितनों में अतिरिक्त निर्माण हुआ है और नियमों का उल्लंघन मिलने पर अब तक कितनी कार्रवाई की गई है। क्योंकि अगर शासन-प्रशासन आज भी नहीं जागा, तो कल किसी हादसे के बाद जागने का कोई मतलब नहीं होगा।

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.