देवरिया अवैध हिरासत मामले में थाने के सीसीटीवी कैमरे के खराब होने की जानकारी सामने आने पर कोर्ट ने एसपी से कड़ी नाराजगी जताई।

देवरिया अवैध हिरासत मामले में थाने के सीसीटीवी कैमरे के खराब होने की जानकारी सामने आने पर कोर्ट ने एसपी से कड़ी नाराजगी जताई। एसपी से पूछा- इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद संबंधित एसएचओ के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कोर्ट ने कहा- SHO सस्पेंड क्यों नहीं हुआ?, माफी अदालत से नहीं, हिरासत में रखे लोगों से मांगिए।
देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को करीब 10 दिनों तक कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में देवरिया के एसपी अभिजीत आर. शंकर और गौरी बाजार थाने के एसएचओ अदालत में पेश हुए।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई में पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी कैमरों और संबंधित अवधि की फुटेज के बारे में जानकारी मांगी थी। सुनवाई के दौरान एसपी और एसएचओ ने अदालत को बताया कि थाने का सीसीटीवी कैमरा खराब था और काम नहीं कर रहा था।
पुलिस अधिकारियों के इस जवाब से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। जस्टिस श्रीधरन ने एसपी देवरिया से सवाल किया- थाने में सीसीटीवी की व्यवस्था में इतनी बड़ी खामी होने के बावजूद संबंधित एसएचओ को निलंबित क्यों नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान एसपी देवरिया ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगी। इस पर कोर्ट ने कहा- माफी अदालत से नहीं, बल्कि उन लोगों से मांगनी चाहिए जिन्हें कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखा गया। मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में हुई।
साथ ही पुलिस अधिकारियों के जवाबों पर नाराजगी जताते हुए जस्टिस श्रीधरन ने मौखिक टिप्पणी में एसपी और एसएचओ को ‘झूठों का झुंड’ तक कह दिया।
अदालत ने राज्य सरकार को तीन याचियों को 20-20 हजार रुपये और एक याची को 5 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। इस तरह कुल 65 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। कोर्ट ने यह राशि संबंधित एसएचओ के वेतन से वसूल कर देने का निर्देश दिया है।
