250 करोड़ प्रति किलोमीटर! ‘गियर बदलने’ निकला एक्सप्रेसवे, टनल के हाल ने मचा दी सनसनी ।

250 करोड़ प्रति किलोमीटर! ‘गियर बदलने’ निकला एक्सप्रेसवे, टनल के हाल ने मचा दी सनसनी ।
उद्घाटन में विकास के बड़े-बड़े दावे… अब सवालों के घेरे में निर्माण की गुणवत्ता, जनता बोली आखिर इतना पैसा गया कहाँ ?
प्राइम इंडिया न्यूज संवाददाता अजीत कुमार दिल्ली ।
द्वारका से बड़ी खबर!
जिस एक्सप्रेसवे को आधुनिक विकास की बड़ी मिसाल बताकर जनता के सामने पेश किया गया, उसी की टनल की तस्वीरों ने अब सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों तक में सवालों की बौछार कर दी है।
बताया गया कि इस परियोजना पर प्रति किलोमीटर करीब 250 करोड़ रुपये तक का खर्च आया। उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे लोगों की जिंदगी बदलने वाली परियोजना बताते हुए विकास के बड़े दावे किए थे।
लेकिन अब तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां करती नजर आ रही हैं।
जिस एक्सप्रेसवे से जिंदगी का ‘गियर बदलने’ का दावा किया गया था, उसी की टनल को देखकर जनता पूछ रही है गियर बदला या सरकारी दावों की पोल खुल गई?
सबसे बड़ा सवाल है कि जब एक किलोमीटर निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हों, तो निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई? क्या निर्माण पूरा होने से पहले और बाद में पर्याप्त तकनीकी जांच हुई? अगर सब कुछ मानकों के मुताबिक था, तो आज ऐसे सवाल क्यों उठ रहे हैं?
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो ने बहस को और तेज कर दिया है। लोग पूछ रहे हैं कि सरकारी प्रोजेक्ट में जनता के टैक्स का पैसा खर्च होता है, तो उसकी गुणवत्ता और जवाबदेही का हिसाब जनता को क्यों नहीं मिलना चाहिए?
पिछले वर्षों में भी कई बड़े सरकारी प्रोजेक्ट उद्घाटन के बाद अपनी गुणवत्ता को लेकर सवालों में आए हैं। ऐसे में द्वारका एक्सप्रेसवे की टनल का मामला भी अब सिर्फ तस्वीरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
अगर निर्माण में कोई खामी है तो जिम्मेदार कौन?
अगर सब कुछ मानकों के अनुसार है तो सरकार इसकी तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं करती?
भ्रष्टाचार का फैसला जांच के बाद ही हो सकता है, लेकिन सवाल उठना तब स्वाभाविक है जब करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता पर उंगली उठे।
क्योंकि जनता के पैसे से बना प्रोजेक्ट किसी नेता की निजी संपत्ति नहीं जनता की अमानत है।
