नगर निगम में ‘वसूली तंत्र’ के आरोप! बेलदार से लेकर अफसरों तक गठजोड़ का दावा, जांच की उठी मांग ।

नगर निगम में ‘वसूली तंत्र’ के आरोप! बेलदार से लेकर अफसरों तक गठजोड़ का दावा, जांच की उठी मांग ।
नगर निगम जनता की सुविधाओं और शहर की व्यवस्था संभालने वाला स्थानीय निकाय है, लेकिन अगर निगम के कर्मचारियों पर ही अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगने लगें तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा है?
आरोप है कि DCC/NZMCD में तैनात रहे बेलदार साहिद खान पर अवैध निर्माणों से कथित वसूली का काम करने के आरोप सामने आए। मामला चर्चा में आने के बाद 2 जून को उसे वहां से हटाकर शाहदरा उत्तरी ज़ोन की M-III डिवीजन में भेजे जाने की बात कही जा रही है।
लेकिन आरोप यहीं खत्म नहीं होते।
दावा है कि नई जगह तैनाती के बावजूद साहिद खान कथित रूप से न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी क्षेत्र में अवैध निर्माणों से संपर्क और वसूली का काम जारी रखे हुए है। आरोप तो यहां तक लगाए जा रहे हैं कि इस कथित वसूली में निगम के कुछ अधिकारियों की भूमिका और हिस्सेदारी भी हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर कर्मचारी की ड्यूटी एक डिवीजन में है, तो वह दूसरे क्षेत्र में जाकर कथित तौर पर किसके निर्देश पर काम कर रहा है? क्या उसकी गतिविधियों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को नहीं है? और यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं?
इसके साथ ही M-III डिवीजन के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर फर्जी हाजिरी तथा दूसरे ज़ोन में कथित वसूली के लिए सुविधा उपलब्ध कराने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं। कथित तौर पर इसके बदले हर महीने रकम दिए जाने की बात कही जा रही है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना चाहिए।
मामला यदि केवल किसी एक कर्मचारी की कथित करतूत है तो भी जांच जरूरी है, लेकिन यदि इसके पीछे अधिकारियों की मिलीभगत या किसी संगठित वसूली तंत्र के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवाल सीधा है—अवैध निर्माण पर कार्रवाई होनी चाहिए या कथित वसूली का खेल चलना चाहिए?
अब जरूरत है कि निगम के वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं, ड्यूटी रिकॉर्ड, हाजिरी, क्षेत्रवार तैनाती और शिकायतों की जांच करें तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो।
जनता जानना चाहती है—नगर निगम में व्यवस्था चलेगी या कथित वसूली का तंत्र?
