October 29, 2026

7 नवंबर को होगा दसवां दीपोत्सव: रामनगरी अयोध्या में दसवें दीपोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक लगातार समीक्षा की जा रही है।

7 नवंबर को होगा दसवां दीपोत्सव: रामनगरी अयोध्या में दसवें दीपोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक लगातार समीक्षा की जा रही है।

अयोध्या।

7 नवंबर को होगा दसवां दीपोत्सव: रामनगरी अयोध्या में दसवें दीपोत्सव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक लगातार समीक्षा की जा रही है।

 

डीएम शशांक त्रिपाठी ने लिया तैयारियों का जायजा: जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं। निर्माण कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और छोटी-मोटी कमियों को दूर कराया जा रहा है।

 

झांकियों और शोभायात्राओं से सजेगी रामनगरी: दीपोत्सव में झांकियों और शोभायात्राओं का आयोजन होगा। राम की पैड़ी पर होने वाले विशेष शो को इस बार और आकर्षक एवं नया बनाने की तैयारी है।

 

श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान: दीपोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। पर्यटन विभाग की ओर से विशेष पैकेज भी उपलब्ध कराया गया है।

 

30 लाख से अधिक दीप जलाने की तैयारी: संत देवेषाचार्य ने कहा कि इस बार 30 लाख से अधिक दीपों से अयोध्या, सरयू तट और मठ-मंदिरों को रोशन करने की तैयारी है। उन्होंने इसे सनातन संस्कृति और भगवान श्रीराम के आदर्शों को प्रदर्शित करने वाला ऐतिहासिक आयोजन बताया।

 

 

कुम्हारों को मिल रहा रोजगार: दीपोत्सव से मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हार परिवारों को बड़े पैमाने पर काम मिल रहा है। एक कुम्हार के मुताबिक, उन्हें एक लाख दीयों का ऑर्डर मिला है, जिन्हें पैक कर आपूर्ति के लिए तैयार किया गया है।

 

मिट्टी के उत्पादों की बढ़ी मांग: कुम्हारों का कहना है कि दीपोत्सव के साथ बाजार में भी मिट्टी के दीयों और कुल्हड़ों की मांग बढ़ी है। इससे पारंपरिक मिट्टी कला से जुड़े लोगों की आमदनी और रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है।

 

सरकारी योजनाओं से कुम्हारों को मदद: कुम्हार ने बताया कि मिट्टी के लिए तालाब का पट्टा और दीये बनाने के लिए चाक मिलने से उन्हें काम में सहूलियत हुई है। उन्होंने रोजगार बढ़ाने में सहयोग के लिए योगी सरकार का आभार जताया।

 

संत देवेषाचार्य ने बताया सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक: संत देवेषाचार्य के अनुसार, भगवान श्रीराम के लंका विजय के बाद अयोध्या आगमन और राज्याभिषेक की परंपरा से दीपोत्सव का सांस्कृतिक महत्व जुड़ा है। उन्होंने लोगों से अयोध्या आकर इस भव्य आयोजन को देखने की अपील की।

 

इकबाल अंसारी ने दिया भाईचारे का संदेश: बाबरी मस्जिद के पैरोकार रहे इकबाल अंसारी ने कहा कि त्योहार सभी के होते हैं। हिंदू और मुसलमान एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं और दिवाली पर मिठाइयां बांटते हैं। उन्होंने अयोध्या की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे को रेखांकित किया।

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