बन्दियों को रक्षाबंधन पर दिया बहनों को मिली बिना जाली के मुलाकात करने का अवसर*

*कानपुर: रक्षाबंधन ब बहनों को मिली बिना जाली के मुलाकात*
संवाददाता: राजन साहू : प्राइम इंडिया न्यूज ।
रक्षाबंधन के दिन कानपुर जिला कारागार में नजारा कुछ अलग था। यहां सुरक्षा के नाम पर भाई-बहन के बीच खड़ी होने वाली लोहे की जाली को इस बार हटा दिया गया। नतीजा ये हुआ कि बहनें पहली बार जेल को घर जैसा महसूस कर सकीं और कैदियों ने भी राखी के साथ सुधरने का वचन दिया।
आमतौर पर रक्षाबंधन पर देशभर की जेलों में कैदियों को बहनों से मिलने की इजाजत तो मिलती है, लेकिन बीच में लोहे की जालीदार दीवार रहती है। इसी दीवार के एक छोटे से छेद से भाई कलाई बाहर निकालता है और बहन राखी बांधती है। कानून की बेड़ियों में बंधा भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन भी उसी जाली के पीछे से देता है।
लेकिन कानपुर कारागार प्रशासन ने इस परंपरा को तोड़ते हुए इस बार सभी बंदिशें हटा दीं। जेल अधिकारियों ने विशेष इंतजाम कर कैदियों को उनकी बहनों से आमने-सामने और खुलकर मिलने दिया। माहौल ऐसा था जैसे बहनें अपने भाई से घर पर मिली हों।
इस सहज मुलाकात से भावुक हुईं बहनें भी अभिभूत दिखीं।
*चाहत, बहन* ने कहा, “आज पहली बार लगा कि हम जेल में नहीं, अपने घर में भाई से मिल रही हैं।”
*आरती तिवारी, बहन* ने भी कहा कि अधिकारियों की इस पहल के बाद उन्होंने अपने भाई से वादा लिया है कि अब भविष्य में कोई गलत काम नहीं करेंगे।
जेल प्रशासन का मानना है कि त्योहारों पर मिलने वाली थोड़ी सी मानवीय छूट कैदियों में सुधार की भावना जगाती है। रक्षाबंधन पर कानपुर जेल में हुई इस पहल की बहनों और कैदियों दोनों ने सराहना की।
