धनबाद में 35 जंगली हाथियों का आतंक: वन विभाग की लापरवाही से टूटी दीवारें, रौंदी गई फसलें; खौफ में जी रहे लोग

धनबाद में 35 जंगली हाथियों का आतंक: वन विभाग की लापरवाही से टूटी दीवारें, रौंदी गई फसलें; खौफ में जी रहे हैं लोग ।
धनबाद जिले के पश्चिमी टुंडी क्षेत्र में वन विभाग की लापरवाही के कारण 32-35 जंगली हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया है। हाथियों ने ‘मां कान्ती एग्रो’ समेत कई घरों की चारदीवारी तोड़ दी और लाखों की फसल रौंद डाली। फिलहाल हाथियों का झुंड दो हिस्सों में बंटकर पलमा और पुरनाडीह के जंगलों में डेरा डाले हुए है, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
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गोवर्धन रजक रफ्तार मीडिया संवाददाता धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले के पश्चिमी टुंडी इलाके में जंगली हाथियों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। वन विभाग की घोर लापरवाही और लचर व्यवस्था के चलते स्थानीय ग्रामीण हर रात दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। सोमवार पूर्व की देर रात मनियाडीह थाना और तोपचांची वन प्रमंडल क्षेत्र के जीतपुर पंचायत (पलमा एवं पुरनाडीह) में 32 से 35 जंगली हाथियों के एक विशाल झुंड ने भारी तांडव मचाया।
‘मां कान्ती एग्रो’ और कई ग्रामीणों की तोड़ी चारदीवारी
जानकारी के अनुसार, रात के अंधेरे में बस्ती में घुसे हाथियों के झुंड ने सबसे पहले पारस सिंह चौधरी द्वारा संचालित ‘मां कान्ती एग्रो’ की मजबूत चारदीवारी को ध्वस्त कर दिया।
हाथियों ने परिसर में लगी अरहर और घांघरा (बरबटी) की फसलों को जमकर खाया और पैरों तले रौंद दिया।
गनीमत रही कि परिसर के एक हिस्से में तेज रोशनी होने के कारण भिंडी, गोभी, टमाटर और मकई की फसलें बच गईं।
इसके बाद झुंड ने पुरनाडीह का रुख किया, जहां पलमा उच्च विद्यालय के प्रधानाचार्य मंटु मुर्मू, पूर्व जिला परिषद सदस्या रायमुनी देवी, रूपलाल कर्मकार और सरकार मुर्मू के घरों की बाउंड्री वॉल भी गिरा दी।
गिरिडीह से खदेड़े गए, टुंडी में घुसे
घटना के संबंध में ‘मां कान्ती एग्रो’ के संचालक पारस सिंह चौधरी ने बताया कि रात करीब 11 बजे हाथियों का यह झुंड गिरिडीह जिले के पीरटांड़ की ओर से खदेड़ा गया था। वहां के मशालचियों ने हाथियों को खदेड़कर टुंडी की सीमा (पलमा) में धकेल दिया, जिसका खामियाजा यहां के ग्रामीणों को भुगतना पड़ा।
दो गुटों में बंटे हाथी, जंगलों में डाला डेरा**
तोपचांची वन विभाग के गार्ड जसीम अंसारी ने बताया कि हाथियों का यह बड़ा झुंड अब दो हिस्सों में बंट चुका है:
पहला गुट: 18-19 हाथियों का झुंड जीतपुर पंचायत के पलमा जंगल में डटा है।
दूसरा गुट: 14-15 हाथियों का झुंड पुरनाडीह के जंगल में जमा हुआ है।
फिलहाल, तोपचांची और पीरटांड़ वन क्षेत्र के मशालची संयुक्त रूप से इन हाथियों को घने जंगलों और पहाड़ों की ओर खदेड़ने के प्रयास में जुटे हैं।
वन विभाग की कार्यशैली पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के पास हाथियों को सुरक्षित रास्तों से गुजारने की कोई ठोस रणनीति नहीं है। एक जिले के अधिकारी हाथियों को खदेड़कर दूसरे जिले में धकेल देते हैं, और इस ‘पासिंग द पार्सल’ के खेल में निर्दोष ग्रामीणों की जान और माल का भारी नुकसान हो रहा है। लगातार हो रहे इस नुकसान से पश्चिमी टुंडी के लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।
