दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के बाहर से आई इन तस्वीरों ने आज करोड़ों दिलों को जीत लिया है,एक बेबस हिंदू माँ, अपनी जिगर के टुकड़े एक मासूम बीमार बच्ची की जान बचाने के लिए, आँखों में आँसू और उम्मीद लिए मस्जिद की चौखट पर पहुँची थी।*

*दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के बाहर से आई इन तस्वीरों ने आज करोड़ों दिलों को जीत लिया है,एक बेबस हिंदू माँ, अपनी जिगर के टुकड़े एक मासूम बीमार बच्ची की जान बचाने के लिए, आँखों में आँसू और उम्मीद लिए मस्जिद की चौखट पर पहुँची थी।*
उस माँ के लिए न कोई मंदिर दूर था, न कोई मस्जिद पराई थी उसे तो बस अपनी बच्ची के लिए दुआएँ और इलाज के लिए मदद चाहिए थी और फिर जो हुआ, उसने साबित कर दिया कि नफरत चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, मोहब्बत और इंसानियत को कभी हरा नहीं सकती।
जैसे ही नमाज खत्म हुई, मस्जिद से बाहर आने वाले नमाजियों और आम लोगों ने बिना एक पल गंवाए इस हिंदू माँ और उसकी मासूम बच्ची की मदद के लिए अपने हाथ बढ़ा दिए किसी ने बच्ची का जात-पात नहीं पूछा, किसी ने उसका धर्म नहीं देखा वहाँ मौजूद हर शख्स की आँखों में बस एक ही तड़प थी इस मासूम की जान बचाना।
लोगों ने दिल खोलकर, भर-भरकर मदद के डिब्बे में पैसे डाले और उस माँ की झोली को दुआओं और उम्मीदों से भर दिया जामा मस्जिद जैसी पाक जगहें गवाह हैं कि यहाँ जब भी कोई उम्मीद लेकर आता है, तो उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती यह तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही है कि संकट की घड़ी में हम सब पहले इंसान हैं, और एक-दूसरे का हाथ थामना ही हमारा सबसे बड़ा सवाब,पुण्य है।
