आरटीआइ में रोहाना खुर्द के बैरियर का जिक्र नहीं, फिर किसके आदेश पर वसूली

आरटीआइ में रोहाना खुर्द के बैरियर का जिक्र नहीं, फिर किसके आदेश पर वसूली ?
रामपुर तिराहा से गागलहेड़ी तक सिर्फ दो टोल का रिकॉर्ड, रोहाना खुर्द जाने वाले रास्ते पर लगे बैरियर का दस्तावेजों में उल्लेख नहीं; अवैध वसूली के आरोप
(सहारनपुर)( उत्तर प्रदेश)
देवबंद। संवाददाता।
घलौली टोल प्लाजा से रोहाना खुर्द गांव जाने वाले रास्ते पर लगाए गए बैरियर को लेकर आरटीआइ से मिली जानकारी के बाद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत मांगी गई जानकारी में रामपुर तिराहा से गागलहेड़ी तक कंपनी की ओर से दो टोल प्लाजा का उल्लेख है, लेकिन रोहाना खुर्द जाने वाले रास्ते पर लगाए गए बैरियर का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है।
आरटीआइ की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने बैरियर को अवैध रूप से लगाए जाने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का सवाल है कि यदि इस रास्ते पर बैरियर लगाकर शुल्क वसूलने की अनुमति है तो संबंधित अधिसूचना, अनुबंध, स्वीकृति अथवा सक्षम प्राधिकारी का आदेश कहां है। यदि ऐसा कोई दस्तावेजी आधार नहीं है तो बैरियर लगाने और शुल्क वसूलने की प्रक्रिया जांच के दायरे में क्यों न लाई जाए।
स्थानीय लोगों के अनुसार रोहाना खुर्द जाने वाले रास्ते पर लंबे समय से बैरियर लगाकर वाहनों से शुल्क लिया जा रहा है। आरटीआइ में स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलने के बाद लोगों ने टोल कंपनी के अनुबंध, टोल स्वीकृति, रूट मैप, निर्धारित शुल्क तथा रोहाना खुर्द वाले बैरियर से वसूली के अधिकार से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।
करोड़ों की वसूली के दावे
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि लंबे समय से इस रास्ते पर शुल्क वसूला जा रहा है और इससे करोड़ों रुपये एकत्र किए गए हैं। हालांकि, वसूली की वास्तविक राशि और उसकी वैधता की पुष्टि सरकारी जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि जांच में बैरियर या वसूली निर्धारित अनुमति के विपरीत पाई जाती है तो संबंधित कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच भी जरूरी होगी।
किसान नेता ने उठाई कार्रवाई की मांग
त्यागी भूमिहार ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष एवं किसान नेता मांगेराम त्यागी ने कहा कि यदि जनता से बिना वैध अधिकार के शुल्क वसूला जा रहा है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और संबंधित विभाग से बैरियर की वैधता, उसे लगाने की अनुमति और अब तक हुई वसूली की जांच कराने की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल—आरटीआइ में रोहाना खुर्द के बैरियर का जिक्र नहीं, तो इसे लगाने की अनुमति किसने दी और जनता से वसूली किस अधिकार के तहत की जा रही है?
