October 20, 2026

दशहरा पर्व पर भी बंद रहा सामुदायिक शौचालय, आखिर किसके आदेश पर लगा ताला ? 

दशहरा पर्व पर भी बंद रहा सामुदायिक शौचालय, आखिर किसके आदेश पर लगा ताला ? 

दशहरा पर्व पर भी बंद रहा सामुदायिक शौचालय, आखिर किसके आदेश पर लगा ताला ?

 

त्योहार में हजारों महिलाओं और पुरुषों का आवागमन, स्वच्छता के लिए परेशान हुए लोग; दीवार पर रात 10 बजे तक संचालन का समय अंकित, फिर भी बंद रहा शौचालय

 

रफ्तार मीडिया संवाददाता | छोटू कुमार

 

छत्तरपुर (पलामू)। दशहरा जैसे प्रमुख पर्व के दिन भी छत्तरपुर बस स्टैंड स्थित सामुदायिक शौचालय बंद रहने से नगर पंचायत की सार्वजनिक सुविधाओं की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। त्योहार के दौरान बस स्टैंड और बाजार क्षेत्र में हजारों की संख्या में महिलाओं और पुरुषों का आवागमन होता है। ऐसे में सार्वजनिक शौचालय बंद रहने से लोगों को स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। पर्व के दौरान दूर-दराज से आने वाले यात्रियों, महिलाओं, बुजुर्गों और बाजार आने वाले लोगों के लिए शौचालय की सुविधा बेहद जरूरी होती है। इसके बावजूद दशहरा के दिन शौचालय का बंद रहना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

 

शौचालय के मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है, जबकि दीवार पर इसके संचालन का समय सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक अंकित है। इसके बावजूद दशहरा के दिन शौचालय बंद रहने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जब निर्धारित समय के अनुसार शौचालय रात 10 बजे तक खुला रहना चाहिए, तो फिर इसे बंद क्यों रखा गया? पर्व के दौरान जब सार्वजनिक सुविधाओं की अधिक जरूरत होती है, तब शौचालय का बंद रहना लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है।

 

कर्मचारी ने बताया, ऊपर से मिला है बंद करने का आदेश

 

शौचालय को बंद रखने के संबंध में कर्मचारी से पूछे जाने पर बताया गया कि ऊपर से इसे बंद करने का आदेश मिला है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शौचालय बंद करने का आदेश किसने दिया? क्या नगर पंचायत प्रशासन की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी किया गया है या किसी अन्य स्तर से शौचालय बंद रखने को कहा गया है? यदि शौचालय के संचालन का समय रात 10 बजे तक निर्धारित है, तो उसे निर्धारित समय से पहले बंद रखने का आदेश क्यों दिया गया?

 

सार्वजनिक शौचालय का उद्देश्य आम लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करना है। खासकर पर्व-त्योहार के दौरान जब बड़ी संख्या में लोग बाजार और बस स्टैंड पहुंचते हैं, तब इस सुविधा की उपयोगिता और बढ़ जाती है। ऐसे में शौचालय बंद रहने से लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति नगर पंचायत की व्यवस्था और निगरानी पर भी सवाल खड़े करती है।

 

नगर पंचायत प्रशासन से उठ रहे सवाल

 

अब सवाल यह है कि दशहरा जैसे प्रमुख पर्व पर सामुदायिक शौचालय बंद रखने का आदेश किसने दिया? जब दीवार पर सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक संचालन का समय अंकित है, तो निर्धारित समय का पालन क्यों नहीं किया गया? त्योहार के दौरान हजारों महिलाओं और पुरुषों की आवाजाही को देखते हुए शौचालय का संचालन क्यों सुनिश्चित नहीं किया गया?

 

नगर पंचायत प्रशासन को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और सार्वजनिक शौचालय का नियमित संचालन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि पर्व-त्योहार के दौरान आम लोगों को स्वच्छता संबंधी परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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