August 25, 2026

विधायको को भारी फंड मिलने के बावजूद एक बारिश में व्यवस्था की हवा निकली कमर तक पानी में जनता, जवाब देने वाला कौन?

विधायको को भारी फंड मिलने के बावजूद एक बारिश में व्यवस्था की हवा निकली कमर तक पानी में जनता, जवाब देने वाला कौन?

महिपालपुर डूबा नहीं, दिल्ली के चारों इंजन डूब गए!

 

विधायकों को भारी फंड मिलने के बावजूद एक बारिश में व्यवस्था की हवा निकली कमर तक पानी में जनता, जवाब देने वाला कौन?

 

दिल्ली प्राइम इंडिया न्यूज़ संवाददाता: अजीत कुमार

 

महिपालपुर में आज हुई बारिश ने सिर्फ सड़कों को नहीं डुबोया, बल्कि चार इंजन की सरकार के विकास के दावों की भी पोल खोलकर रख दी। कुछ घंटों की बारिश में सड़कें कमर तक पानी में डूब गईं। आम लोग रास्ता तलाशते रहे और स्कूली बच्चे पानी के बीच से घर लौटने को मजबूर नजर आए।

 

सवाल यह नहीं कि बारिश कितनी तेज थी। असली सवाल यह है कि जब विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में विकास और जनसुविधाओं के लिए भारी फंड मिलता है, तो फिर बारिश आते ही सड़कें जलमग्न क्यों हो जाती हैं?

 

अगर करोड़ों के फंड, सरकारी विभाग, जनप्रतिनिधि और पूरा प्रशासनिक तंत्र मौजूद है, तो महिपालपुर की जनता को हर बारिश में यही मुसीबत क्यों झेलनी पड़ती है?

 

चार इंजन की सरकार की बात खूब हुई, लेकिन महिपालपुर में आज चारों इंजन पानी में खड़े नजर आए। विकास के दावे कागजों पर चाहे जितने चमकदार हों, सड़क पर भरा गंदा पानी उन दावों की असली तस्वीर जनता के सामने रख देता है।

 

सबसे ज्यादा चिंता उन स्कूली बच्चों की है जिन्हें जलभराव के बीच से गुजरना पड़ा। किताबों का बैग कंधे पर और कमर तक पानी पैरों के नीचे—यह तस्वीर किसी भी जिम्मेदार व्यवस्था के लिए शर्म और चिंता दोनों का विषय होनी चाहिए।

 

अब जनता जानना चाहती है कि बारिश से पहले नालों की सफाई, जलनिकासी और जलभराव रोकने की तैयारियों पर कितना काम हुआ? फंड कहां खर्च हुआ? और अगर सब कुछ ठीक था तो महिपालपुर की सड़कें तालाब क्यों बन गईं?

 

जनता को आंकड़े नहीं, जवाब चाहिए।

जनता को भाषण नहीं, समाधान चाहिए।

जनता को दावे नहीं, ऐसी व्यवस्था चाहिए जो बारिश के समय उसके साथ खड़ी दिखाई दे।

 

महिपालपुर की यह तस्वीर सिर्फ एक इलाके की कहानी नहीं, बल्कि राजधानी की व्यवस्था के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल है।

 

महिपालपुर डूबा नहीं आज जनता ने चार इंजन की सरकार के दावों को पानी में उतरते हुए देख लिया। अब सवाल है, अगली बारिश से पहले जिम्मेदार जागेंगे या फिर जनता को एक बार फिर इसी पानी में उतरना पड़ेगा?

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