दिवाली तक गड्ढामुक्त का दावा फेल, पैचवर्क के बाद और खतरनाक हुईं सड़कें ।

में तब्दील सड़कें / पैचवर्क की पोल*
दिवाली तक गड्ढामुक्त का दावा फेल, पैचवर्क के बाद और खतरनाक हुईं सड़कें ।
*कानपुर। संवाददाता राजन साहू ।* शहर की सड़कों को दीवाली तक गड्ढामुक्त और समतल करने का जिम्मेदारों ने बड़ा दावा किया था। दावा था कि इसके बाद लोग फर्राटा भरेंगे। बयान के बाद शहर में कई जगह काम शुरू भी हुआ। हो सकता है कि निर्धारित समय पर काम पूरा भी दिखा दिया जाए, मगर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। शहरवासियों को राहत मिलने के बजाय परेशानी और बढ़ गई है।
कारण है सिर्फ पैचवर्क। कई सड़कों पर पूरी तरह हॉटमिक्स या नई लेयर बिछाने के बजाय गड्ढों पर पैच लगा दिया गया। पैचवर्क के बाद सड़कें समतल होने के बजाय और ऊंची-नीची हो गई हैं। इससे गुजरने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को लगातार झटके लग रहे हैं। पैचवर्क के कुछ दिन बाद ही गिट्टी उखड़ कर सड़क पर फैलने लगी है, जिससे फिसलकर गिरने का डर बना रहता है। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि पैचवर्क के बाद मौके पर कोई बैरिकेडिंग नहीं लगाई जा रही है। कच्चे पैच पर ही वाहन बेधड़क निकल रहे हैं, जिससे सड़क बनने से पहले ही उखड़ रही है।
इसकी सबसे खराब तस्वीर कृष्णा नगर वार्ड-24 में देखने को मिली है। यह इलाका पॉश इलाके में गिना जाता है, बावजूद इसके यहां की मुख्य सड़क महीनों से बदहाल है। फोटो में साफ दिख रहा है कि सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं। यहां तो पैचवर्क तक नहीं हुआ, बल्कि गड्ढों को ईंट और मलबे से भरकर खानापूर्ति कर दी गई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, थोड़ी ही दूरी पर पाइपलाइन लीकेज की समस्या है। दिनभर सड़क पर पानी भरा रहता है, जिससे फिसलन बनी रहती है और पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। लेकिन जलकल विभाग ने इसे ठीक करना जरूरी नहीं समझा।
रात में स्ट्रीट लाइट की रोशनी कम होने से गड्ढे दिखाई नहीं देते, कई बार बाइक सवार गिरकर चोटिल हो चुके हैं। दर्जनों स्कूली बसें और ऑटो इसी रास्ते से गुजरते हैं, जिसमें छोटे बच्चे सफर करते हैं। मंदिर जाने वाले बुजुर्गों और महिलाओं को भी इसी टूटी सड़क से गुजरना पड़ता है।
स्थानीय निवासियों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग की है कि 2027 चुनाव को ध्यान में रखकर औपचारिकता न की जाए, बल्कि गुणवत्ता के साथ सड़कों की मरम्मत कराई जाए, ताकि हादसों को रोका जा सके।
