अपने ही दलित मंडल अध्यक्ष के साथ कथित मारपीट के आरोपों से घिरे भाजपा विधायक गजेंद्र द्राल।

अपने ही दलित मंडल अध्यक्ष के साथ कथित मारपीट के आरोपों से घिरे भाजपा विधायक गजेंद्र द्राल ।
सवालों के घेरे में संगठन: अगर आरोप सही हैं तो भाजपा की चुप्पी क्यों? दलित कार्यकर्ता के सम्मान और सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
प्राइम इंडिया न्यूज
अजीत कुमार दिल्ली
नई दिल्ली। भाजपा विधायक गजेंद्र द्राल पर अपनी ही पार्टी के दलित मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार को घर बुलाकर कथित तौर पर बंधक बनाने, मारपीट करने और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों ने राजनीतिक गलियारों से लेकर पार्टी संगठन तक कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आरोप लगाने वाला व्यक्ति कोई आम बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि भाजपा का मंडल अध्यक्ष बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि पार्टी के एक पदाधिकारी ने ही अपने विधायक के खिलाफ इतने गंभीर आरोप लगाए हैं, तो क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच नहीं होनी चाहिए?
सबसे बड़ा सवाल भाजपा नेतृत्व की भूमिका पर भी है। क्या पार्टी इन आरोपों की जांच कराएगी? क्या आरोप सही पाए जाने पर संगठनात्मक कार्रवाई होगी? और क्या कानून व पार्टी अनुशासन सभी के लिए समान है?
दलित सम्मान और सामाजिक बराबरी का मुद्दा किसी राजनीतिक दल की सीमा में नहीं बंधता। इसलिए आरोपों की सच्चाई सामने आना जरूरी है। यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के जरिए स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि आरोपों में सच्चाई मिलती है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानून और पार्टी के नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सवाल सिर्फ सुनील कुमार का नहीं, बल्कि हर उस कार्यकर्ता के सम्मान और सुरक्षा का है जो संगठन में भरोसे के साथ काम करता है। भाजपा नेतृत्व को इस मामले में चुप्पी तोड़कर जनता और अपने कार्यकर्ताओं के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
