August 5, 2026

हरिद्वार कांवड़ यात्रा: लापरवाही ले रही कांवड़ियों की जान, 48 घंटों तक लगभग 6 कांवड़ियों की गई जान ।

हरिद्वार कांवड़ यात्रा: लापरवाही ले रही कांवड़ियों की जान, 48 घंटों तक लगभग 6 कांवड़ियों की गई जान ।

हरिद्वार कांवड़ यात्रा: लापरवाही ले रही कांवड़ियों की जान, 48 घंटों में 6 मौतें

कांवड़ यात्रा में छोटी सी लापरवाही कांवड़ियों की जान ले रही है. पिछले दो दिन में 6 लोगों की जान जा चुकी है.
हरिद्वार: सावन का महीना शुरू होते ही उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार और ऋषिकेश करोड़ों शिवभक्तों क कदमों से गुलजार हो गई है. गंगाजल लेने आने वाले कांवड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. लेकिन दूसरी तरफ, दुर्घटनाओं का ग्राफ भी ऊपर जाने लगा है. सड़क हादसा, गंगा में डूबना, वाहन पलटना जैसी घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, यात्रा पड़ाव से जुड़े उत्तराखंड, यूपी और हरियाणा राज्य के स्थानीय प्रशासन ने हर साल की तरह सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. बावजूद 2 दिन में 6 कांवड़ियों की मौत ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

बरसात में उफनती नदियां सबसे बड़ा खतरा:कांवड़ यात्रा का अधिकांश हिस्सा मॉनसून के दौरान गुजरता है. यही समय होता है जब गंगा समेत उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ रहता है. पहाड़ों में बारिश से हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा और अन्य नदियों का जलस्तर कई गुना बढ़ जाता है. कई श्रद्धालु चेतावनी के बावजूद गहरे पानी में उतर जाते हैं या सेल्फी लेने या किनारे से आगे बढ़ने के दौरान तेज बहाव का शिकार हो जाते हैं. नदी के किनारे मौजूद फिसलन भरी चट्टानें और अचानक बढ़ने वाला जलस्तर कई बार अनुभवी तैराकों के लिए भी जानलेवा साबित होता है. यही कारण है कि हर साल नदियों में कांवड़ियों के डूबने की घटनाएं प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी रहती है.

इतना ही नहीं, गंगा और उनकी सहायक नदियों में स्नान करने वाले शिव भक्त कई बार ऊंचे पुलों से भी छलांग लगाने के चक्कर में अपनी जान गवां देते हैं.

हमारी टीम लगातार इस तरह के संवेदनशील इलाकों में तैनात है. लेकिन कई बार देखा जाता है कि लोग बहुत लापरवाही करते हैं, जिस वजह से हादसे होते हैं. हमारी तैराक दल से लेकर तमाम रेस्क्यू टीम लोगों को बचा भी रही है और समझा भी रही है.
-नवनीत भुल्लर, हरिद्वार एसएसपी-

ऋषिकेश और हरिद्वार के ये घाट माने जाते हैं संवेदनशील:हरिद्वार और ऋषिकेश में कुछ स्थान ऐसे हैं, जहां हर साल अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ती है. हर की पैड़ी के आसपास मुख्य धारा के अलावा भीमगौड़ा बैराज क्षेत्र, बैराज के नीचे के हिस्से, नीलधारा, कांगड़ा घाट, प्रेमनगर आश्रम, ज्वालापुर के आसपास का क्षेत्र और चंडी पुल के नीचे का हिस्सा संवेदनशील माना जाता है.

वहीं ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के आसपास गहरे पानी वाले हिस्से, बैराज क्षेत्र, लक्ष्मण झूला और राम झूला के आसपास की धारा, शिवपुरी की ओर जाने वाले कई नदी तट और अनधिकृत स्नान स्थल बारिश के दौरान बेहद खतरनाक हो जाते हैं. प्रशासन इन क्षेत्रों को लेकर लगातार चेतावनी जारी करता है. लेकिन कई लोग बैरिकेडिंग पार कर जोखिम उठा लेते हैं. जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. 31 जुलाई को भी लापरवाही के कारण चार नाबालिग कांवड़िए हरिद्वार में गंगा स्नान के दौरान बह गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई थी.

वाहनों पर ओवरलोडिंग भी हादसे का कारण
तेज रफ्तार और स्टंटबाजी, श्रद्धा पर भारी:कांवड़ यात्रा के दौरान हादसों की एक बड़ी वजह तेज गति से वाहन चलाना भी है. कई युवा कांवड़िए बाइकों और अन्य वाहनों पर चलते हैं. एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़, स्टंट करना, अचानक लेन बदलना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कई बार जानलेवा साबित होती है. रात के समय लाइट कम होने के कारण दुर्घटना का खतरा और भी बढ़ जाता है. कई मामलों में चालक थकान के बावजूद लगातार वाहन चलाते रहते हैं, जिससे वाहन पर नियंत्रण खोने की घटनाएं सामने आती हैं. हरिद्वार के बहादराबाद में 1 अगस्त को एक लोहे का गाडर गिरने से दो शिव भक्तों की मौत हो गई. फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है.

लगभग 60 लाख से ज्यादा कांवड़िए आ चुके हैं हरिद्वार

हमारी टीम लगातार चौक चौराहे पर तैनात है. हम लगातार दिशा निर्देश दे रहे हैं. आने वाले शिव भक्तों से भी अपील कर रहे हैं कि गाड़ियों की गति धीमी रखें और सुरक्षित यात्रा करें. कई बार छोटी लापरवाही दूसरे लोगों को भी खतरे में डाल देती है.

बिना साइलेंसर की दौड़ती बाइकें:यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में ऐसी बाइकें दिखाई देती हैं, जिनके मॉडिफाइड साइलेंसर लगाए जाते हैं. तेज आवाज पैदा करने की होड़ में कई बार वाहन के इंजन और एग्जॉस्ट सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. लगातार लंबी दूरी, बिना रुके चलना और इंजन के अत्यधिक गर्म होने से वाहन में तकनीकी खराबी आ जाती है. इससे बीच सड़क पर बाइक बंद होने के कारण संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है और कई बार दुर्घटना की संभावना बन जाती है. हालांकि, पुलिस भी ऐसे वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई करती रही है. लेकिन हर साल बड़ी संख्या में मॉडिफाइड वाहन यात्रा मार्ग पर दिखाई देते हैं. 2025 में लगभग 70 लोग इसी वजह से घायल हुए थे. जबकि अलग-अलग हादसों में 14 लोगों की मौत अकेले गढ़वाल रीजन में ही हुई थी.

कई श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉली, खुले ट्रकों और अन्य मालवाहक वाहनों में बैठकर यात्रा करते हैं. कई बार लोग ट्रैक्टर के बोनट, ट्रॉली की दीवारों या ऊपर रखे सामान पर बैठ जाते हैं. तेज गति से चल रहे ट्रैक्टर ट्रॉली में अचानक ब्रेक या सड़क के गड्ढों के कारण संतुलन बिगड़ने से लोग नीचे गिर जाते हैं और अन्य वाहनों की चपेट में आने से हादसों का शिकार हो जाते हैं. वाहन चालक की थकान और लंबे सफर के दौरान लापरवाही दुर्घटनाओं की आशंका को कई गुना बढ़ा देती है. लगातार ऐसे वाहनों पर निगरानी रखी जा रही है. लेकिन आने वाले शिव भक्तों को भी इस बात का ध्यान देना चाहिए.

-नवनीत भुल्लर, एसएसपी हरिद्वार- का कहना है कि
रात में बिना रोशनी की कांवड़ का सफर और थकान, मौत का कारण:कई श्रद्धालु दिन की गर्मी से बचने के लिए रात में यात्रा करना पसंद करते हैं. लेकिन रात में बिना पर्याप्त रिफ्लेक्टर, बिना लाइट और गहरे रंग के कपड़ों में चल रहे समूह दूर से दिखाई नहीं देते. कई जगह बड़ी कांवड़ सड़क के बीच से गुजरती है. जबकि पीछे आने वाले वाहन समय रहते उसे नहीं देख पाते. दूसरी ओर लगातार कई किलोमीटर पैदल चलने के कारण थकान बढ़ जाती है. पर्याप्त आराम न मिलने से श्रद्धालुओं का संतुलन बिगड़ता है और सड़क पार करते समय या वाहन के पास से गुजरते हुए दुर्घटनाएं हो जाती हैं. यही वजह है कि प्रशासन बार-बार रिफ्लेक्टिव जैकेट, पर्याप्त विश्राम और निर्धारित मार्ग का उपयोग करने की सलाह देता है.
तेज गति से बाइक चलाने के दौरान संतुलन खोने से हो रहे हादसों का शिकार ।
प्रशासन की तैयारी मजबूत लेकिन सुरक्षा में जनभागीदारी सबसे जरूरी:उत्तराखंड पुलिस, एसडीआरएफ, जल पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन यात्रा के दौरान संयुक्त रूप से सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं. संवेदनशील घाटों पर गोताखोर, मोटरबोट, सीसीटीवी, ड्रोन निगरानी, मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और ट्रैफिक डायवर्जन जैसी व्यवस्थाएं की जाती हैं. इसके बावजूद अधिकारी लगातार यह स्वीकार करते हैं कि अधिकांश दुर्घटनाओं की जड़ नियमों की अनदेखी और व्यक्तिगत लापरवाही होती है. यदि श्रद्धालु चेतावनी बोर्डों का पालन करें, प्रतिबंधित क्षेत्रों में स्नान न करें, तेज रफ्तार से बचें, वाहन की तकनीकी जांच कराकर ही यात्रा करें और पर्याप्त आराम के साथ सफर करें तो बड़ी संख्या में हादसों को रोका जा सकता है.

कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि अनुशासन, संयम और जिम्मेदारी की भी परीक्षा है. भगवान शिव की भक्ति का सबसे बड़ा संदेश धैर्य और आत्मसंयम माना जाता है. यदि श्रद्धालु यात्रा के दौरान ट्रैफिक नियमों का पालन करे, प्रशासन के निर्देशों को गंभीरता से लें, जोखिम भरे घाटों, तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें और सुरक्षित यात्रा को प्राथमिकता दें तो हजारों परिवार अपनों को खोने के दर्द से बच सकते हैं. श्रद्धा तभी सार्थक है जब यात्रा सकुशल पूरी हो और हर श्रद्धालु सुरक्षित अपने घर लौटे.हरिद्वार कांवड़ यात्रा: लापरवाही ले रही कांवड़ियों की जान, 48 घंटों में 6 मौतें

कांवड़ यात्रा में छोटी सी लापरवाही कांवड़ियों की जान ले रही है. पिछले दो दिन में 6 लोगों की जान जा चुकी है.

हरिद्वार: सावन का महीना शुरू होते ही उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार और ऋषिकेश करोड़ों शिवभक्तों क कदमों से गुलजार हो गई है. गंगाजल लेने आने वाले कांवड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. लेकिन दूसरी तरफ, दुर्घटनाओं का ग्राफ भी ऊपर जाने लगा है. सड़क हादसा, गंगा में डूबना, वाहन पलटना जैसी घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, यात्रा पड़ाव से जुड़े उत्तराखंड, यूपी और हरियाणा राज्य के स्थानीय प्रशासन ने हर साल की तरह सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. बावजूद 2 दिन में 6 कांवड़ियों की मौत ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

बरसात में उफनती नदियां सबसे बड़ा खतरा:कांवड़ यात्रा का अधिकांश हिस्सा मॉनसून के दौरान गुजरता है. यही समय होता है जब गंगा समेत उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ रहता है. पहाड़ों में बारिश से हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा और अन्य नदियों का जलस्तर कई गुना बढ़ जाता है. कई श्रद्धालु चेतावनी के बावजूद गहरे पानी में उतर जाते हैं या सेल्फी लेने या किनारे से आगे बढ़ने के दौरान तेज बहाव का शिकार हो जाते हैं. नदी के किनारे मौजूद फिसलन भरी चट्टानें और अचानक बढ़ने वाला जलस्तर कई बार अनुभवी तैराकों के लिए भी जानलेवा साबित होता है. यही कारण है कि हर साल नदियों में कांवड़ियों के डूबने की घटनाएं प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी रहती है.

इतना ही नहीं, गंगा और उनकी सहायक नदियों में स्नान करने वाले शिव भक्त कई बार ऊंचे पुलों से भी छलांग लगाने के चक्कर में अपनी जान गवां देते हैं.

हमारी टीम लगातार इस तरह के संवेदनशील इलाकों में तैनात है. लेकिन कई बार देखा जाता है कि लोग बहुत लापरवाही करते हैं, जिस वजह से हादसे होते हैं. हमारी तैराक दल से लेकर तमाम रेस्क्यू टीम लोगों को बचा भी रही है और समझा भी रही है.

– ऋषिकेश में कुछ स्थान ऐसे हैं, जहां हर साल अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ती है. हर की पैड़ी के आसपास मुख्य धारा के अलावा भीमगौड़ा बैराज क्षेत्र, बैराज के नीचे के हिस्से, नीलधारा, कांगड़ा घाट, प्रेमनगर आश्रम, ज्वालापुर के आसपास का क्षेत्र और चंडी पुल के नीचे का हिस्सा संवेदनशील माना जाता है.

वहीं ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के आसपास गहरे पानी वाले हिस्से, बैराज क्षेत्र, लक्ष्मण झूला और राम झूला के आसपास की धारा, शिवपुरी की ओर जाने वाले कई नदी तट और अनधिकृत स्नान स्थल बारिश के दौरान बेहद खतरनाक हो जाते हैं. प्रशासन इन क्षेत्रों को लेकर लगातार चेतावनी जारी करता है. लेकिन कई लोग बैरिकेडिंग पार कर जोखिम उठा लेते हैं. जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. 31 जुलाई को भी लापरवाही के कारण चार नाबालिग कांवड़िए हरिद्वार में गंगा स्नान के दौरान बह गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई थी.

वाहनों पर ओवरलोडिंग भी हादसे का कारण

तेज रफ्तार और स्टंटबाजी, श्रद्धा पर भारी:कांवड़ यात्रा के दौरान हादसों की एक बड़ी वजह तेज गति से वाहन चलाना भी है. कई युवा कांवड़िए बाइकों और अन्य वाहनों पर चलते हैं. एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़, स्टंट करना, अचानक लेन बदलना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कई बार जानलेवा साबित होती है. रात के समय लाइट कम होने के कारण दुर्घटना का खतरा और भी बढ़ जाता है. कई मामलों में चालक थकान के बावजूद लगातार वाहन चलाते रहते हैं, जिससे वाहन पर नियंत्रण खोने की घटनाएं सामने आती हैं. हरिद्वार के बहादराबाद में 1 अगस्त को एक लोहे का गाडर गिरने से दो शिव भक्तों की मौत हो गई. फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है.

55 लाख से ज्यादा कांवड़िए आ चुके हैं हरिद्वार

हमारी टीम लगातार चौक चौराहे पर तैनात है. हम लगातार दिशा निर्देश दे रहे हैं. आने वाले शिव भक्तों से भी अपील कर रहे हैं कि गाड़ियों की गति धीमी रखें और सुरक्षित यात्रा करें. कई बार छोटी लापरवाही दूसरे लोगों को भी खतरे में डाल देती है.

बिना साइलेंसर की दौड़ती बाइकें:यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में ऐसी बाइकें दिखाई देती हैं, जिनके मॉडिफाइड साइलेंसर लगाए जाते हैं. तेज आवाज पैदा करने की होड़ में कई बार वाहन के इंजन और एग्जॉस्ट सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. लगातार लंबी दूरी, बिना रुके चलना और इंजन के अत्यधिक गर्म होने से वाहन में तकनीकी खराबी आ जाती है. इससे बीच सड़क पर बाइक बंद होने के कारण संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है और कई बार दुर्घटना की संभावना बन जाती है. हालांकि, पुलिस भी ऐसे वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई करती रही है. लेकिन हर साल बड़ी संख्या में मॉडिफाइड वाहन यात्रा मार्ग पर दिखाई देते हैं. 2025 में लगभग 70 लोग इसी वजह से घायल हुए थे. जबकि अलग-अलग हादसों में 14 लोगों की मौत अकेले गढ़वाल रीजन में ही हुई थी.

कई श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉली, खुले ट्रकों और अन्य मालवाहक वाहनों में बैठकर यात्रा करते हैं. कई बार लोग ट्रैक्टर के बोनट, ट्रॉली की दीवारों या ऊपर रखे सामान पर बैठ जाते हैं. तेज गति से चल रहे ट्रैक्टर ट्रॉली में अचानक ब्रेक या सड़क के गड्ढों के कारण संतुलन बिगड़ने से लोग नीचे गिर जाते हैं और अन्य वाहनों की चपेट में आने से हादसों का शिकार हो जाते हैं. वाहन चालक की थकान और लंबे सफर के दौरान लापरवाही दुर्घटनाओं की आशंका को कई गुना बढ़ा देती है. लगातार ऐसे वाहनों पर निगरानी रखी जा रही है. लेकिन आने वाले शिव भक्तों को भी इस बात का ध्यान देना चाहिए.

-नवनीत भुल्लर, एसएसपी हरिद्वार- का कहना है किरात में बिना रोशनी की कांवड़ का सफर और थकान, मौत का कारण:कई श्रद्धालु दिन की गर्मी से बचने के लिए रात में यात्रा करना पसंद करते हैं. लेकिन रात में बिना पर्याप्त रिफ्लेक्टर, बिना लाइट और गहरे रंग के कपड़ों में चल रहे समूह दूर से दिखाई नहीं देते. कई जगह बड़ी कांवड़ सड़क के बीच से गुजरती है. जबकि पीछे आने वाले वाहन समय रहते उसे नहीं देख पाते. दूसरी ओर लगातार कई किलोमीटर पैदल चलने के कारण थकान बढ़ जाती है. पर्याप्त आराम न मिलने से श्रद्धालुओं का संतुलन बिगड़ता है और सड़क पार करते समय या वाहन के पास से गुजरते हुए दुर्घटनाएं हो जाती हैं. यही वजह है कि प्रशासन बार-बार रिफ्लेक्टिव जैकेट, पर्याप्त विश्राम और निर्धारित मार्ग का उपयोग करने की सलाह देता है.

तेज गति से बाइक चलाने के दौरान संतुलन खोने से हो रहे हादसों का शिकार

प्रशासन की तैयारी मजबूत लेकिन सुरक्षा में जनभागीदारी सबसे जरूरी:उत्तराखंड पुलिस, एसडीआरएफ, जल पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन यात्रा के दौरान संयुक्त रूप से सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं. संवेदनशील घाटों पर गोताखोर, मोटरबोट, सीसीटीवी, ड्रोन निगरानी, मेडिकल कैंप, एंबुलेंस और ट्रैफिक डायवर्जन जैसी व्यवस्थाएं की जाती हैं. इसके बावजूद अधिकारी लगातार यह स्वीकार करते हैं कि अधिकांश दुर्घटनाओं की जड़ नियमों की अनदेखी और व्यक्तिगत लापरवाही होती है. यदि श्रद्धालु चेतावनी बोर्डों का पालन करें, प्रतिबंधित क्षेत्रों में स्नान न करें, तेज रफ्तार से बचें, वाहन की तकनीकी जांच कराकर ही यात्रा करें और पर्याप्त आराम के साथ सफर करें तो बड़ी संख्या में हादसों को रोका जा सकता है.

कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि अनुशासन, संयम और जिम्मेदारी की भी परीक्षा है. भगवान शिव की भक्ति का सबसे बड़ा संदेश धैर्य और आत्मसंयम माना जाता है. यदि श्रद्धालु यात्रा के दौरान ट्रैफिक नियमों का पालन करे, प्रशासन के निर्देशों को गंभीरता से लें, जोखिम भरे घाटों, तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें और सुरक्षित यात्रा को प्राथमिकता दें तो हजारों परिवार अपनों को खोने के दर्द से बच सकते हैं. श्रद्धा तभी सार्थक है जब यात्रा सकुशल पूरी हो और हर श्रद्धालु सुरक्षित अपने घर लौटे.

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.