तिरंगे की आन, देशभक्ति की शान: दारुल उलूम गुलशने रजा मदरसे में गूंजा राष्ट्रप्रेम का संदेश

तिरंगे की आन, देशभक्ति की शान: दारुल उलूम गुलशने रजा मदरसे में गूंजा राष्ट्रप्रेम का संदेश ।
2002 से हर स्वतंत्रता दिवस पर फहर रहा तिरंगा, तलबा ने भी निभाई राष्ट्रीय पर्व की परंपरा ।
बिलासपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर न्यायधानी बिलासपुर के कुडूदंड स्थित विष्णुनगर वार्ड क्रमांक 16 में दारुल उलूम गुलशने रजा मदरसा देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। मदरसा परिसर में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया। मदरसा के नायब सदर सैय्यद सईद (राजू खान) ने विधिवत ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इस दौरान परिसर में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का संदेश दिखाई दिया।
ध्वजारोहण कार्यक्रम में मदरसा संचालक कारी हाफिज हाजी शब्बीर साहब, खजांची बशीर खान, सैय्यद कारी अरशद अली, कारी हाफिज दानिश रजा, हाफिज वशीम, हाफिज फखरे आलम, अनीश कुरैशी, अफजल खान तथा बिलासपुर प्रेस क्लब के सह सचिव हरिकिशन गंगवानी सहित मदरसे के तलबा (बच्चे) और अन्य लोग मौजूद रहे।
2002 से कायम है तिरंगा फहराने की परंपरा
मदरसा नायब सदर सैय्यद सईद (राजू खान) ने बताया कि दारुल उलूम गुलशने रजा मदरसे का निर्माण वर्ष 2001 में हुआ था। वर्ष 2002 से लगातार प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मदरसा परिसर में राष्ट्रीय तिरंगा फहराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस के साथ ही 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर भी विधिवत ध्वजारोहण किया जाता है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी जारी है और राष्ट्रीय पर्वों के माध्यम से नई पीढ़ी को देश के प्रति सम्मान एवं जिम्मेदारी का संदेश देने का प्रयास किया जाता है।
तिरंगे के नीचे तलबा ने लिया राष्ट्रप्रेम का संदेश
स्वतंत्रता दिवस का यह अवसर मदरसे में अध्ययनरत तलबा के लिए भी खास रहा। राष्ट्रीय ध्वज के नीचे आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को स्वतंत्रता दिवस के महत्व, तिरंगे के सम्मान और राष्ट्र के प्रति नागरिक कर्तव्यों की भावना से जोड़ा गया।
मदरसा परिसर में लहराता तिरंगा स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के त्याग और बलिदान की याद दिलाता नजर आया। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।
राष्ट्रीय पर्व साझा गौरव और एकता का प्रतीक
मदरसा प्रबंधन के अनुसार, राष्ट्रीय पर्व किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं होते, बल्कि पूरे देश के साझा गौरव और विरासत का हिस्सा हैं। स्वतंत्रता दिवस देश की आजादी के लिए किए गए संघर्ष और बलिदानों को याद करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराने का अवसर भी है।
दारुल उलूम गुलशने रजा मदरसे में वर्ष 2002 से स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण की परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है। करीब ढाई दशक से फहराता आ रहा तिरंगा राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और देशभक्ति की उस भावना का प्रतीक बना हुआ है, जो समाज के अलग-अलग वर्गों को एक सूत्र में जोड़ती है।
PRIME INDIA NEWS
पिंकू यादव
ब्यूरो चीफ, बिलासपुर संभाग, छत्तीसगढ़
