इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत परिसर में नारेबाजी और न्यायिक कार्यवाही बाधित करने के मामले को गंभीरता से लिया।

*प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट में हंगामे पर सख्त रुख।*
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत परिसर में नारेबाजी और न्यायिक कार्यवाही बाधित करने के मामले को गंभीरता से लिया।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने हंगामा करने वाले अधिवक्ताओं की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालने और अगली सुनवाई तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
पहचान होने पर संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला भेजा जा सकता है और अवमानना की कार्रवाई भी संभव है।
मामला 27 अक्टूबर की कोर्ट नंबर 49 की घटना के विरोध में 28 अक्टूबर को हुए अधिवक्ताओं के प्रदर्शन से जुड़ा है। नारेबाजी के चलते आसपास की अदालतों में न्यायिक कार्यवाही प्रभावित हुई।
पीठ ने कहा कि वादकारियों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया बाधित नहीं होनी चाहिए।
किसी अदालत से शिकायत होने पर दूसरी अदालतों के बाहर नारेबाजी, कार्यवाही में व्यवधान या डराने वाली भाषा उचित नहीं है।
विवाद की शुरुआत कोर्ट नंबर 49 में पुलिस अधिकारी के बैठने की जगह को लेकर हुए विवाद से हुई थी।
बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र देकर घटना पर आपत्ति जताई और कोर्ट के बहिष्कार की चेतावनी दी थी।
विरोध प्रदर्शन के दौरान न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत में हंगामे और फर्नीचर को नुकसान पहुंचाने की खबरें भी सामने आईं।
मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी, आगे की कार्रवाई सीसीटीवी फुटेज और रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।
