September 11, 2026

करोड़ों की लागत से विकसित हो रहा ऐतिहासिक घोरदौड़ पोखरा, ग्रामीणों में असंतोष ।

करोड़ों की लागत से विकसित हो रहा ऐतिहासिक घोरदौड़ पोखरा, ग्रामीणों में असंतोष ।

करोड़ों की लागत से विकसित हो रहा ऐतिहासिक घोरदौड़ पोखरा, ग्रामीणों में असंतोष ।

एक साल से चल रहा विकास कार्य, फिर भी पर्यटन स्थल का स्वरूप नहीं; पोखरा की चौड़ाई घटाने का भी आरोप

 

मोतिहारी |सत्येंद्र कुमार सिंह

 

पूर्वी चंपारण के पताही प्रखंड अंतर्गत पदुमकेर पंचायत का ऐतिहासिक घोरदौड़ पोखरा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की योजना के बावजूद ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री की पदयात्रा के दौरान इस ऐतिहासिक पोखरा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल हुई थी। इसके बाद स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के अनुरोध पर करोड़ों रुपये की लागत से इसके विकास की योजना स्वीकृत हुई।

 

करीब एक वर्ष से यहां विकास कार्य चल रहा है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक पोखरा का अपेक्षित जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण नहीं हो सका है। ग्रामीणों के मुताबिक जिस उद्देश्य से ऐतिहासिक पोखरा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी, वह धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है।

 

पोखरा की जमीन पर ही बांध बनाने का आरोप

 

ग्रामीणों और मुखिया प्रतिनिधि सरोज सिंह का आरोप है कि पोखरा के चारों ओर मजबूत बांध एवं संरचना विकसित करने के बजाय पोखरा के अंदर से ही मिट्टी निकालकर बांध का निर्माण कर दिया गया। इससे पोखरा की चौड़ाई कम होने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पोखरा के किनारे बांध का निर्माण होना चाहिए था, लेकिन पोखरा के ही हिस्से की मिट्टी का इस्तेमाल किए जाने से उसका मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है।

 

ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और योजना के प्राक्कलन के अनुसार कार्य होने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की योजना के बावजूद स्थल पर पर्यटन केंद्र जैसी सुविधाएं और सुंदरता नजर नहीं आ रही है।

 

मछली पालन शुरू, संरक्षण पर सवाल

 

पोखरा में जगह-जगह मछली पालन किए जाने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब ऐतिहासिक पोखरा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए योजना स्वीकृत की गई है, तो विकास कार्य के बीच मछली पालन कैसे शुरू हो गया। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच की मांग की है।

 

चारों ओर धार्मिक स्थल, विकास की थी बड़ी उम्मीद

 

ग्रामीणों के अनुसार पोखरा के चारों ओर कई धार्मिक स्थल और मंदिर हैं। यदि पोखरा का समुचित विकास और सौंदर्यीकरण होता तो यह स्थान धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता था। दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए यहां बेहतर वातावरण तैयार हो सकता था।

 

मुखिया प्रतिनिधि एवं पूर्व सैनिक सरोज सिंह का कहना है कि वे लगातार इस ऐतिहासिक धरोहर के विकास के लिए प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पंचायत की ऐतिहासिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।

 

उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर से यदि इसका विकास कराया जाता तो शायद इससे बेहतर परिणाम सामने आते। अब करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि पोखरा अपने मूल स्वरूप में विकसित नहीं हो पा रहा है तो यह चिंता का विषय है।

 

एनओसी और विकास कार्य पर भी उठ रहे सवाल

 

धार्मिक स्थलों के विकास को लेकर एनओसी की प्रक्रिया के संबंध में अंचलाधिकारी से जानकारी लेने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि पोखरा चिन्हित है और एनओसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि जब जमीन चिन्हित कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है, तो धरातल पर विकास कार्य उस स्वरूप में क्यों नहीं दिखाई दे रहा है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि पर्यटन स्थल के लिए जमीन चिन्हित करने और उस पर करोड़ों रुपये की योजना लगाने के बावजूद यदि कार्य की गुणवत्ता और मूल स्वरूप को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

 

जांच की मांग, जिम्मेदारी किसकी?

 

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि निर्माण कार्य की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है और प्राक्कलन के अनुरूप कार्य कराया जा रहा है या नहीं, इसकी जांच कौन करेगा। उनका कहना है कि मामले में प्रखंड प्रशासन से लेकर अनुमंडल एवं जिला प्रशासन तक के अधिकारियों को स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए।

 

मुखिया प्रतिनिधि सरोज सिंह ने कहा कि वे इस मामले को लेकर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के दरवाजे लगातार खटखटाते रहेंगे। जरूरत पड़ने पर वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात भी कह रहे हैं। उनका कहना है कि वे इस ऐतिहासिक धरोहर को समाप्त नहीं होने देंगे और ग्रामीणों की भावनाओं से जुड़े इस पोखरा के समुचित विकास के लिए अंतिम स्तर तक संघर्ष करेंगे।

 

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की लागत से जिस ऐतिहासिक पोखरा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनी, एक वर्ष से काम चलने के बावजूद वह पर्यटन स्थल के रूप में क्यों नजर नहीं आ रहा है? पोखरा की मिट्टी से ही बांध बनाए जाने और बीच में मछली पालन शुरू होने के आरोपों की जांच कौन करेगा? यह जांच का विषय है कि इसके लिए संबंधित निर्माण एजेंसी जिम्मेदार है, निगरानी तंत्र, प्रशासन या योजना से जुड़े अन्य स्तर।

 

रफ्तार मीडिया की पड़ताल में ग्रामीणों की नाराजगी और निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवाल अब जांच की मांग तक पहुंच चुके हैं।

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