उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना या विधानसभा के अधिकारियों, कर्मचारियों के बारे में भ्रामक, असत्य या आपत्तिजनक जानकारी पोस्ट करने पर एफआईआर हो सकती है.

“उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना या विधानसभा के अधिकारियों, कर्मचारियों के बारे में भ्रामक, असत्य या आपत्तिजनक जानकारी पोस्ट करने पर एफआईआर हो सकती है..”*
विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने आज सूचना विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर सोशल मीडिया की लगाम कसने के संकेत दिए हैं..
उन्होंने पत्र में लिखा है कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर विधानसभा और विधानसभा सचिवालय के बारे में अनर्गल, सत्य एवं निराधार सामग्री पोस्ट की जा रही है.. विधानसभा एक संवैधानिक संस्था है और वहां के लोगों पर निराधार या असत्य टिप्पणी अनुचित और अविधिक है.. जो भी ये कर रहा है, उसके खिलाफ सुसंगत नियमों एवं विधिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाए..
हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के कुछ बयान सोशल मीडिया पर छाए रहे.. उनके बयानों की तमाम लोगों ने अपने-अपने हिसाब से व्याख्या की.. किसी ने तारीफ की तो किसी ने तंज कसे.. तारीफ तो अच्छी लगी लेकिन तंज बुरे लगे.. उसके बाद ही ये चिट्ठी जारी हुई..
मीठा मीठा गप गप.. कड़वा कड़वा थू..
ये नहीं चलेगा भई.. सोशल मीडिया पर लगाम लगाना किसी के बस की बात नहीं.. गलत को गलत कहा ही जाएगा..
