शॉर्टकट से अमीर बनने की चाहत में खाकी हुई शर्मसार! चंद रुपयों के लालच ने वर्दी की साख पर लगाया दाग ?

शॉर्टकट से अमीर बनने की चाहत में खाकी हुई शर्मसार! चंद रुपयों के लालच ने वर्दी की साख पर लगाया दाग?
हत्या के मामले में राहत दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपये मांगने का आरोप, पहले 40 हजार लेने की शिकायत; शेष 10 हजार रुपये लेते एसीबी ने एएसआई को रंगे हाथ पकड़ा
अजीत कुमार
प्राइम इंडिया न्यूज ।
चंडीगढ़/झज्जर, 12 अक्टूबर 2026। जनता की सुरक्षा, कानून की रक्षा और पीड़ितों को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी जिस खाकी वर्दी पर होती है, उसी वर्दी को पहनने वाले एक सहायक उपनिरीक्षक पर रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप सामने आया है। हरियाणा के रोहतक जिले के सांपला थाने में तैनात एएसआई दिनबंधु को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की झज्जर टीम ने कथित तौर पर 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने शिकायतकर्ता के बेटे नितेश और उसके दोस्त को दर्ज आपराधिक मामले में राहत दिलाने तथा उनके साथ मारपीट नहीं होने देने के बदले कथित तौर पर 50 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसमें से 40 हजार रुपये पहले ही दिए जा चुके थे और शेष 10 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने नियमानुसार जाल बिछाया और कथित तौर पर बाकी रकम लेते समय आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आरोपी दिनबंधु, पुत्र भागचंद, उम्र करीब 50 वर्ष, निवासी गांव खरबाला, जिला हिसार, थाना सांपला में तैनात था। आरोपी के खिलाफ 12 अक्टूबर 2026 को अभियोग संख्या 33 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आम नागरिक जब किसी मामले में पुलिस के पास पहुंचता है, तो उसे निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई की उम्मीद होती है, न कि कथित रिश्वत की मांग का सामना करने की।
शॉर्टकट से अमीर बनने की कथित चाहत यदि किसी कर्मचारी को भ्रष्टाचार की राह पर ले जाती है, तो इससे न केवल संबंधित अधिकारी की छवि प्रभावित होती है, बल्कि ईमानदारी से ड्यूटी करने वाले दूसरे पुलिसकर्मियों की प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठते हैं। खाकी की असली पहचान उसके अधिकार या रुतबे से नहीं, बल्कि ईमानदारी, निष्पक्षता और जनता के विश्वास से होती है। ऐसे मामलों में जांच को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाना और साक्ष्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई करना आवश्यक है। हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा और उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी काम के बदले रिश्वत मांगता है, तो इसकी सूचना संबंधित ब्यूरो को दें। अब इस मामले में जांच के निष्कर्ष और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।
