40 वर्षों से आस्था का केंद्र बनी रतनवा चौक की दुर्गापूजा, इस बार 1008 कन्याओं की कलश यात्रा ।

40 वर्षों से आस्था का केंद्र बनी रतनवा चौक की दुर्गापूजा, इस बार 1008 कन्याओं की कलश यात्रा ।
फेनहारा |अजीत शर्मा
फेनहारा प्रखंड के मधुबनी-रतनवा चौक पर आयोजित होने वाली दुर्गापूजा इस क्षेत्र में पिछले करीब 40 वर्षों से आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनी हुई है। हर वर्ष नवरात्र के दौरान यहां दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इस वर्ष भी नवयुवक दुर्गा पूजा समिति की ओर से भव्य आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्षों से चली आ रही इस पूजा से क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। श्रद्धालु मां भगवती के दरबार में अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं और मन्नत पूरी होने पर पूजा-अर्चना तथा प्रसाद चढ़ाकर आभार व्यक्त करते हैं। यही वजह है कि समय के साथ यह आयोजन केवल पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के गांवों के लोगों के लिए धार्मिक मिलन और सामाजिक एकजुटता का अवसर भी बन गया है।
1008 कन्याओं की निकलेगी भव्य कलश यात्रा
इस बार पूजा की शुरुआत विशेष आकर्षण के साथ होगी। रतनवा चौक से पताही सीवान स्थित ऐतिहासिक गोपाल राय पोखरा तक 1008 कुंवारी कन्याओं की कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी। पिछले वर्ष 751 कन्याओं ने कलश यात्रा में भाग लिया था। इस बार संख्या बढ़ाकर 1008 की गई है। समिति की ओर से कलश यात्रा में शामिल कन्याओं को सम्मान स्वरूप अंगवस्त्र भी प्रदान किया जाएगा।
मन्नतों और आस्था से जुड़ा है मां का दरबार
स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि मां दुर्गा के इस दरबार में वर्षों से लोग अपनी मनोकामना लेकर आते रहे हैं। कई परिवारों के लिए यह पूजा पीढ़ियों पुरानी आस्था से जुड़ी है। नवरात्र के दौरान महिलाएं, पुरुष और युवा बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर मां की पूजा-अर्चना करते हैं। आसपास के समाज के लोगों की सहभागिता से पूजा समिति आयोजन को सफल बनाने में जुटी है।
मंदिर के दूसरे स्वरूप का भी चल रहा कार्य
पूजा स्थल से जुड़े धार्मिक परिसर को और बेहतर स्वरूप देने की दिशा में भी कार्य चल रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए मंदिर के दूसरे स्वरूप के निर्माण/विकास का कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। समिति और स्थानीय समाज के लोगों का प्रयास है कि आने वाले समय में यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की पहचान के रूप में भी विकसित हो।
चंदे के बजाय श्रद्धालुओं की स्वेच्छा से होता है आयोजन
पूजा समिति के अध्यक्ष सह पूर्व पैक्स अध्यक्ष देव नारायण राय ने बताया कि वर्षों से यहां की पूजा की एक खास परंपरा रही है। आयोजन के लिए ग्रामीणों और दुकानदारों पर चंदे का दबाव नहीं बनाया जाता। श्रद्धालु अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करते हैं। इसी सामूहिक सहभागिता से हर वर्ष पूजा का आयोजन होता है।
इस बार करीब 12 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान
व्यवस्थापक अजय कुमार यादव के अनुसार पिछले वर्ष पूजा आयोजन में करीब 8.5 लाख रुपये खर्च हुए थे। इस बार पंडाल, सजावट, धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए करीब 12 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। काशी, देवरिया और गोरखपुर से भजन मंडलियों को भी आमंत्रित किया गया है, जिनके द्वारा नवरात्र के दौरान भक्ति कार्यक्रम और सत्संग प्रस्तुत किए जाएंगे।
CCTV से होगी निगरानी
श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पूजा परिसर और आसपास के महत्वपूर्ण स्थानों पर CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं। समिति की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है, ताकि नवरात्र का आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रतनवा चौक की यह दुर्गापूजा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि चार दशक से अधिक समय से चली आ रही ऐसी परंपरा है, जिसमें आस्था, मन्नत, सामाजिक सहभागिता और आपसी भाईचारा एक साथ दिखाई देता है।
