दिल्ली के शाहदरा में फूटा दलित समाज का प्रचंड आक्रोश, राहुल गांधी के खिलाफ किया विकराल प्रदर्शन ।

दिल्ली के शाहदरा में फूटा दलित समाज का प्रचंड आक्रोश, राहुल गांधी के खिलाफ किया विकराल प्रदर्शन ।
बिहारी कॉलोनी की लाल बत्ती पर दलित समाज के लोगों ने फूंका राहुल गांधी का पुतला, पहनाई चप्पलों की माला ।
राहुल गांधी हाय-हाय के जोरदार नारों से गूंजा शाहदरा, चक्का जाम कर दर्ज कराया कड़ा विरोध ।
दलितों के विकास और सम्मान का विरोध करने वाले राहुल गांधी का बहिष्कार करे पूरा दलित समाज ।
देश में दलित समाज से आने वाली महान विभूति को शीर्ष संवैधानिक पद की घोषणा के बाद से ही भारतीय राजनीति में गर्माहट और हलचल काफी बढ़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा दलित समाज के प्रोत्साहन और संवैधानिक सम्मान के खिलाफ अपनाए जा रहे रुख से आक्रोशित होकर दिल्ली के शाहदरा में दलित समाज के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा बिहारी कॉलोनी की लाल बत्ती के पास दलित समाज के लोगों ने एकत्र होकर राहुल गांधी के खिलाफ एक विकराल और उग्र प्रदर्शन किया।
शाहदरा में आयोजित इस विशाल विरोध प्रदर्शन में दलित समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए आक्रोशित जनसैलाब ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए पूरे चौराहे को घेर लिया, जिससे रोड पर पूरी तरह से चक्का जाम हो गया प्रदर्शन के दौरान दलित समाज का आक्रोश चरम पर दिखाई दिया, जब लोगों ने राहुल गांधी का पुतला बनाया, उसे सार्वजनिक रूप से चप्पलों की माला पहनाई और फिर जोरदार नारेबाजी के बीच पुतले का दहन किया।
#_ जब भी दलित आगे बढ़ता है, राहुल गांधी विरोध में खड़े होते हैं
प्रदर्शन के दौरान दलित समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और वक्ताओं ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जब भी देश में किसी दलित को सरकार या व्यवस्था द्वारा आगे प्रोत्साहित किया जाता है या उन्हें उच्च पदों पर आसीन किया जाता है, तब-तब राहुल गांधी और उनकी पार्टी उसके विरोध में उतर आते हैं दलित समाज के लोगों का कहना था कि राहुल गांधी की यह नीतियां और बयान स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि वे दलित समाज की प्रगति, अधिकार और सम्मान के घोर विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि जो नेता दलितों के उत्थान को पचा न सके, दलित समाज को ऐसे नेता का पूर्ण रूप से निरादर और बहिष्कार करना चाहिए।
#_कांग्रेस द्वारा दलित समाज के विरोध का काला इतिहास
प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस के लंबे शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब दलित समाज ने अपने अधिकारों और नेतृत्व की बात की है, कांग्रेस ने उनका दमन और विरोध ही किया है
1. संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर का अपमान: स्वतंत्र भारत के इतिहास में कांग्रेस पार्टी ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को न केवल दो-दो बार लोकसभा चुनावों में हराने का षड्यंत्र रचा, बल्कि उन्हें उनके जीवनकाल में और मृत्यु के बाद भी दशकों तक सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से वंचित रखा।
2. दलित नेतृत्व का दमन: कांग्रेस के शासनकाल में जब भी किसी सक्षम दलित नेता ने राष्ट्रीय राजनीति में अपना स्थान बनाना चाहा, उसे सोची-समझी रणनीति के तहत किनारे कर दिया गया। महान दलित नेता बाबू जगजीवन राम जी को प्रधानमंत्री पद के नैसर्गिक अवसर से वंचित रखना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
3. संवैधानिक शीर्ष पदों पर दलितों का विरोध: जब भी देश में किसी दलित या वंचित वर्ग के प्रतिनिधि को राष्ट्रपति या सर्वोच्च संवैधानिक पदों के लिए आगे बढ़ाया जाता है, राहुल गांधी और कांग्रेस हमेशा उसके खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने और विरोध दर्ज कराने में सबसे आगे रहते हैं।
#_ समाज ने दिया स्पष्ट संदेश
शाहदरा के बिहारी कॉलोनी की लाल बत्ती पर हुए इस विकराल प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि देश का दलित समाज अब अपने मान-सम्मान और स्वाभिमान को लेकर पूरी तरह जागरूक हो चुका है। दलित समाज के लोगों ने चेतावनी दी कि यदि राहुल गांधी ने दलितों के प्रति अपनी इस विरोधी मानसिकता को नहीं बदला, तो आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली के हर कोने और पूरे देश में फैलाया जाएगा।
