September 20, 2026

जल, जंगल, जमीन के साथ झारखंडी संस्कृति की रक्षा भी हमारी जिम्मेदारी : गणेश महाली।

जल, जंगल, जमीन के साथ झारखंडी संस्कृति की रक्षा भी हमारी जिम्मेदारी : गणेश महाली।

जल, जंगल, जमीन के साथ झारखंडी संस्कृति की रक्षा भी हमारी जिम्मेदारी : गणेश महाली।

सरायकेला : राजनगर प्रखंड के एदल गांव में मां मनसा पूजा के अवसर पर आयोजित झूमर कार्यक्रम में पूर्व प्रत्याशी सह झामुमो केंद्रीय सदस्य गणेश महाली शामिल हुए। उन्होंने आयोजन समिति एवं ग्रामीणों का उत्साहवर्धन करते हुए झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संकल्प दोहराया।गणेश महाली ने कहा कि झारखंड की पहचान केवल खनिज संपदा से नहीं, बल्कि यहां की मिट्टी, संस्कृति, परंपरा और संघर्ष की विरासत से है। झूमर झारखंड की लोक पहचान और जड़ों की आवाज है। गांवों में आयोजित ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम सामाजिक एकता, भाईचारे और आपसी सद्भाव को मजबूत करते हैं। साथ ही, नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम करते हैं।उन्होंने कहा कि झामुमो झारखंडी अस्मिता, अधिकार और सम्मान की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाता रहा है। जल, जंगल और जमीन के अधिकार के साथ भाषा, संस्कृति, परंपरा और लोक कलाओं की रक्षा भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान और अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि गांव की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा तथा ग्रामीणों के सम्मान, अधिकार और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी।मौके पर कुबेर सारंगी, संकु नंदी, मुखिया शंभू सरदार, संटू नायक, ग्राम प्रधान महेश्वर गोप समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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