एक तरफ आप खुद को हिंदू, सनातनी और हिंदुस्तानी कहते हैं, दूसरी तरफ अपने विचारों से असहमति रखने वाली महिलाओं के लिए वेश्याओं जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं ।

पहले अपने सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति की बात समझिए!
एक तरफ आप खुद को हिंदू, सनातनी और हिंदुस्तानी कहते हैं, दूसरी तरफ अपने विचारों से असहमति रखने वाली महिलाओं के लिए वेश्याओं जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं और उनके चरित्र पर सवाल उठाते हुए उनकी कीमत तक तय करने लगते हैं। आखिर यह कैसी संस्कृति है और यह कैसी धार्मिक शिक्षा है?
हमारे सनातन धर्म में नारी के सम्मान की बात होती है, देवी स्वरूप मानकर पूजा की परंपरा है। फिर किसी महिला के विचारों, उसके विरोध या उसके आंदोलन में शामिल होने के कारण उसे अपमानित करने का अधिकार आपको किसने दे दिया?
भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार देता है, साथ ही महिलाओं को भी समानता, गरिमा और सम्मान का अधिकार प्राप्त है। विरोध के तरीके पर सवाल उठाइए, विचारों से असहमति जताइए, गलत लगे तो तथ्यों के साथ आलोचना कीजिए लेकिन महिलाओं के लिए गंदे शब्दों का इस्तेमाल करके अपनी ही संस्कृति और संस्कारों पर सवाल खड़े मत कीजिए।
एक सीधा सवाल है: अगर यही अपमानजनक भाषा किसी के घर की बेटी, बहन या पत्नी के लिए इस्तेमाल की जाए, तो क्या तब भी आप इसे सही ठहराएंगे?
याद रखिए, किसी महिला के आंदोलन से सहमत होना या न होना आपका अधिकार है, लेकिन उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाना आपकी असहमति का औचित्य नहीं बन सकता।
सनातनी होने का दावा करना आसान है, लेकिन सनातन के मूल्यों में नारी का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है। धर्म की पहचान दूसरों को अपमानित करने से नहीं, बल्कि अपने आचरण और संस्कारों से होती है। 🙏
