October 16, 2026

दुर्गा शक्ति नागपाल ने केवल सरकारी जमीन पर धर्म स्थल बनाने का प्रयास कर रहे लोगों को मात्र चेतावनी दी थी।

दुर्गा शक्ति नागपाल ने केवल सरकारी जमीन पर धर्म स्थल बनाने का प्रयास कर रहे लोगों को मात्र चेतावनी दी थी।

ज्यादा पुरानी नही सन् 2013 की बात है”

 

आजम खान” के नेतृत्व में अखिलेश यादव की सरकार ने पूरे यूपी को शर्मसार कर दिया था।

 

दुर्गा शक्ति नागपाल (IAS) ने गौतमबुद्ध नगर जिले में उस समय के समाजवादी खनन माफियाओं के खिलाफ अभियान छेड़ने की गलती कर बैठीं।

 

अखिलेश यादव ने बेचारी को सस्पैंड कर दिया था क्योंकि सपा के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रही थीं।

 

यूपी तो छोड़ो, सारे देश में बवाल मचा था।

 

IAS ऐसोसियेशन, IPS ऐसोसियेशन, चीफ सेक्रेटरी, हाईकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट, और खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हस्तक्षेप किया।

 

मगर अखिलेश यादव ने उस महिला IAS अधिकारी का सस्पेंशन Revoke करने बजाय, उसे चार्जशीट दे दिया।

 

इस पूरे प्रकरण मे गौर करने वाली बात ये थी कि ग्रेटर नोएडा के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट रविकांत ने खुद मामले की जाँच करके रिपोर्ट दाखिल की थी जिसमें उन्होने बाकायदा लिखा था कि दुर्गा शक्ति नागपाल ने मस्जिद की दीवार गिराना तो दूर की बात है, वहाँ अभी तक कोई दीवार बनी ही नही थी।

 

वहाँ केवल कथित मस्जिद बनाने के लिए नींव खोदी जा रही थी, क्योंकि वो जगह सरकारी थी, और सुप्रीमकोर्ट के आदेशानुसार किसी भी सरकारी जमीन पर कब्जा करना और उस पर धर्म स्थल बनाना अवैध है।

 

इसीलिए दुर्गा शक्ति नागपाल पर दीवार गिराने का आरोप लगाना ही गलत है।

 

दुर्गा शक्ति नागपाल ने केवल सरकारी जमीन पर धर्म स्थल बनाने का प्रयास कर रहे लोगों को मात्र चेतावनी दी थी।

 

एक मुख्यमंत्री की जिद और खुले तुष्टीकरण के चलते, IAS एसोसिएशन, पूरी ब्यूरोक्रेट लाॅबी, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और प्रधानमंत्री तक पानी भरते नजर आये।

प्रधानमंत्री तक की नहीं चलती थी, क्योंकि इसी मुलायम ने जनवरी 2013 में अल्पमत में आई UPA सरकार को गिरने से बचाया था।

 

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