उज्ज्वला योजना के नाम पर ₹500 वसूली: सेंटर बंद, लेकिन सवाल बरकरार, तीन-चार महीने तक लोगों से लिए गए ₹500-₹500, अब उठ रहा सवाल—फॉर्म भरवाने वाले कौन थे ?

उज्ज्वला योजना के नाम पर ₹500 वसूली: सेंटर बंद, लेकिन सवाल बरकरार, तीन-चार महीने तक लोगों से लिए गए ₹500-₹500, अब उठ रहा सवाल—फॉर्म भरवाने वाले कौन थे ?
साहिबाबाद। शहीद नगर पुलिस चौकी, थाना साहिबाबाद के पीछे उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन दिलाने के नाम पर लोगों से कथित रूप से ₹500-₹500 लिए जाने के मामले में अब कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला सामने आने के बाद जिस आशादीप फाउंडेशन के सेंटर का नाम सामने आ रहा था, उसके बंद होने की बात कही जा रही है। लेकिन सेंटर बंद होने के बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि पिछले तीन-चार महीनों से लोगों से गैस कनेक्शन के नाम पर राशि लेने वाले लोग आखिर कौन थे?
फॉर्म कहां भरे गए और ₹500 किसने लिए?
स्थानीय लोगों के मुताबिक, उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन दिलाने की बात कहकर लोगों को संबंधित स्थान पर बुलाया जाता था और कथित तौर पर आवेदन के नाम पर ₹500 लिए जाते थे। लोगों के बीच यह भी बताया गया कि वहां फॉर्म भरने की प्रक्रिया चल रही थी।
मामले में सवाल इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि जिस स्थान पर लोगों के फॉर्म भरने की बात सामने आई, वह संपत्ति आशादीप फाउंडेशन से संबंधित बताई जा रही है।
सेंटर के बोर्ड पर हर्ष कुमार चेटी का नंबर
जानकारी के अनुसार सेंटर के बोर्ड पर दर्ज मोबाइल नंबरों में हर्ष कुमार चेटी का मोबाइल नंबर भी शामिल है। चेटी को आशादीप फाउंडेशन का प्रमुख बताया जाता है।
इसी को लेकर यह जानने का प्रयास किया गया कि क्या उज्ज्वला योजना के नाम पर फॉर्म भरने और लोगों से ₹500 लेने की प्रक्रिया की जानकारी आशादीप फाउंडेशन को थी? क्या संस्था ने इसके लिए किसी व्यक्ति अथवा एजेंसी को अधिकृत किया था? और यदि संस्था का इस पूरी प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं था, तो उसके सेंटर और उससे संबंधित परिसर में यह गतिविधि कैसे चलती रही?
इन सवालों का जवाब जानने के लिए हर्ष कुमार चेटी से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
सेंटर बंद होने से मामला खत्म नहीं होता
सेंटर बंद किए जाने की बात सामने आने के बाद भी लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि यदि तीन-चार महीने तक लोगों से ₹500-₹500 लिए गए, तो उस राशि का हिसाब क्या है? लोगों को इसकी रसीद दी गई या नहीं? फॉर्म किस संस्था अथवा गैस एजेंसी के नाम पर भरे गए? और जिन लोगों ने पैसा दिया, उनके आवेदन का क्या हुआ?
पुलिस और संबंधित विभाग से जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने पुलिस तथा संबंधित विभाग से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि उज्ज्वला योजना के नाम पर बिना अधिकृत अनुमति के धन लिया गया है, तो इसकी जांच कर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ₹500 लेने वाले लोग कौन थे और क्या उन्हें आशादीप फाउंडेशन की जानकारी या सहयोग प्राप्त था?
यदि आशादीप फाउंडेशन का इस पूरी प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं था, तो संस्था के नाम से जुड़े सेंटर और परिसर में लोगों से कथित तौर पर पैसे लेकर फॉर्म भरने की गतिविधि कैसे चलती रही—इसका जवाब भी जांच में सामने आना जरूरी है।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आशादीप फाउंडेशन, हर्ष कुमार चेटी, संबंधित गैस एजेंसी और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
