September 11, 2026

वाह रे सरकारी तंत्र! विधायक ने पूछा—पैसा तो नहीं लेते? मरीज बोला—इलाज के लिए दिए ₹40 हजार ।

वाह रे सरकारी तंत्र! विधायक ने पूछा—पैसा तो नहीं लेते? मरीज बोला—इलाज के लिए दिए ₹40 हजार ।

वाह रे सरकारी तंत्र! विधायक ने पूछा—पैसा तो नहीं लेते? मरीज बोला—इलाज के लिए दिए ₹40 हजार ।

संजयनगर के सरकारी अस्पताल में कथित वसूली से मचा हड़कंप, मरीज ने डॉक्टर एके सिंह पर लगाए गंभीर आरोप; 9 सितंबर को भी ₹20 से ₹25 हजार लेने की शिकायत

गाजियाबाद। सरकारी अस्पताल में गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर एवं निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे उस समय सवालों के घेरे में आ गए, जब मरीजों से इलाज के नाम पर कथित तौर पर हजारों रुपये वसूलने की शिकायत सामने आई। संजयनगर स्थित सरकारी अस्पताल में हमीरपुर के विधायक द्वारा मरीजों से सीधे पूछा गया कि इलाज सही हो रहा है या कोई पैसा तो नहीं लेता, इस पर प्रिंस नाम के मरीज ने कथित तौर पर जो जवाब दिया, उसने अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

मरीज प्रिंस ने विधायक के सामने आरोप लगाया कि वह डॉक्टर एके सिंह को 40 हजार रुपये देकर अपना इलाज करवा रहा है। मरीज के इस कथित बयान के बाद अस्पताल में हलचल मच गई और सरकारी अस्पताल में इलाज के नाम पर पैसे लिए जाने के आरोपों ने गंभीर रूप ले लिया।

एक मामला नहीं, कई मरीजों से रकम लेने के आरोप

मरीजों के मुताबिक मामला केवल प्रिंस तक सीमित नहीं है। आरोप है कि 9 सितंबर को राहुल समेत अन्य मरीजों से भी 20 हजार से 25 हजार रुपये तक लिए गए। शिकायत करने वालों का आरोप है कि मामले की भनक लगने के बाद इसे मीडिया तक पहुंचने से रोकने का प्रयास किया गया और डॉक्टरों ने आपस में समझा-बुझाकर मामले को रफा-दफा कर दिया।

यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल सीधा है—सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों से हजारों रुपये आखिर किस मद में लिए जा रहे हैं?

ENT वार्ड में भी ऑपरेशन के नाम पर ₹10 हजार लेने का आरोप

अस्पताल के नाक, कान एवं गला (ENT) वार्ड को लेकर भी मरीजों ने गंभीर शिकायतें की हैं। आरोप है कि डॉक्टर राजेन्द्र गोला द्वारा ऑपरेशन के नाम पर 10 हजार रुपये लिए गए। इसके अलावा मरीजों को अस्पताल के बाहर स्थित मेडिकल स्टोर से दवाइयां लिखे जाने की भी शिकायत सामने आई है।

इन आरोपों ने अस्पताल की व्यवस्था, डॉक्टरों की कार्यप्रणाली और मरीजों के अधिकारों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मरीज बोले—गरीब जाए तो जाए कहां?

सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले गरीब मरीज यदि कथित तौर पर हजारों रुपये देने को मजबूर होते हैं, तो सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मरीजों का कहना है कि इलाज के लिए रकम मांगे जाने से सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को होती है, जो निजी अस्पताल का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं।

अब जरूरत केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की है। अस्पताल प्रशासन को मरीजों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि किस मरीज से कितनी रकम ली गई, किसके कहने पर ली गई और यदि ऑपरेशन अथवा इलाज के नाम पर रकम ली गई तो उसका सरकारी रिकॉर्ड क्या है।

सबसे बड़ा सवाल

क्या विधायक के सामने मरीज द्वारा लगाए गए ₹40 हजार के आरोप की निष्पक्ष जांच होगी? क्या 9 सितंबर को ₹20–25 हजार लेने की शिकायतों की जांच होगी? और क्या ENT वार्ड में ₹10 हजार लेने के आरोप पर भी कार्रवाई होगी?

सरकारी अस्पताल में आने वाला मरीज इलाज कराने आता है, सौदेबाजी करने नहीं। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों की तह तक पहुंचते हैं या फिर मामला एक बार फिर आपसी समझाइश के बीच दबकर रह जाता है।

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