August 8, 2026

दिल्ली डूबी, सिस्टम सोया! बुराड़ी बना तालाब—बारिश ने खोली ‘कागज़ी विकास’ की पोल, जनता पूछ रही है: बजट गया कहाँ?

दिल्ली डूबी, सिस्टम सोया! बुराड़ी बना तालाब—बारिश ने खोली ‘कागज़ी विकास’ की पोल, जनता पूछ रही है: बजट गया कहाँ?

दिल्ली डूबी, सिस्टम सोया! बुराड़ी बना तालाब—बारिश ने खोली ‘कागज़ी विकास’ की पोल, जनता पूछ रही है: बजट गया कहाँ?

 

अजीत कुमार: दिल्ली

राजधानी दिल्ली में बारिश ने एक बार फिर उन दावों की कलई खोल दी है, जिनमें विकास की बड़ी-बड़ी तस्वीरें दिखाई जाती हैं। बुराड़ी इलाके से सामने आया जलभराव का यह वीडियो सिस्टम के उन दावों पर सीधा सवाल खड़ा करता है, जिनके नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की बात कही जाती है।

सड़कें पानी में डूबी हैं, वाहन रेंग रहे हैं और आम आदमी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी बचाने के लिए पानी के बीच रास्ता तलाशने को मजबूर है। सवाल सिर्फ बारिश का नहीं है—सवाल उस व्यवस्था का है जो हर साल बारिश से पहले तैयारियों के नाम पर कागज भरती है और बारिश आते ही उन्हीं कागजों की स्याही पानी में बहती नजर आती है।

बारिश ने नहीं, व्यवस्था ने डुबोया!

जनता के टैक्स के पैसे से नालों की सफाई, जलनिकासी और बरसात की तैयारियों पर बजट खर्च होता है। फिर भी अगर बारिश होते ही सड़कें तालाब बन जाएं तो सवाल उठना लाजिमी है—आखिर जिम्मेदारी किसकी है?

क्या नालों की सफाई वास्तव में हुई थी या सिर्फ फाइलों में पूरी कर दी गई?

क्या करोड़ों रुपये के बजट का जमीनी हिसाब जनता के सामने रखा जाएगा?

और अगर व्यवस्था पहले से तैयार थी, तो बुराड़ी की सड़कें पानी में क्यों डूबी हुई हैं?

नेताओं से बड़ा सवाल—जनता को सिर्फ भाषण चाहिए या समाधान?

चुनाव आते ही जनता को विकास के सपने दिखाए जाते हैं। मंचों से बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन जब वही जनता बारिश में जलभराव से जूझती है, तब जिम्मेदार लोग दिखाई क्यों नहीं देते?

जनता अब सवाल पूछ रही है—अगर विकास जमीन पर हुआ है तो उसका असर बारिश में क्यों नहीं दिखता?

भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच होनी चाहिए, सरकारी खर्च का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए और अगर कहीं लापरवाही या भ्रष्टाचार साबित होता है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। जनता के पैसे से बनी व्यवस्था जनता को राहत देने के लिए है, नेताओं की तस्वीरें चमकाने के लिए नहीं।

यह सिर्फ पानी नहीं, जवाबदेही का सवाल है!

बुराड़ी का यह जलभराव प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए चेतावनी है। अब जनता को आश्वासन नहीं, नतीजे चाहिए।

बारिश हर साल होगी—लेकिन क्या हर साल दिल्ली इसी तरह डूबती रहेगी?

पत्रकार की कलम का असली काम सिर्फ खबर दिखाना नहीं, बल्कि वह सवाल पूछना भी है जिसे सत्ता सुनना नहीं चाहती।

और आज वही सवाल बुराड़ी की सड़कों से उठ रहा है—

“जब जनता का पैसा विकास पर खर्च हुआ, तो बारिश आते ही विकास कहाँ बह गया?”

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.