सरिता विहार में 6-7 दिन का नवजात मिला बेसहारा—इंसानियत ने छोड़ा, PCR बनी फरिश्ता; AIIMS में जिंदगी की जंग जारी

मां की गोद चाहिए थी… सड़क किनारे फेंक दिया !
सरिता विहार में 6-7 दिन का नवजात मिला बेसहारा—इंसानियत ने छोड़ा, PCR बनी फरिश्ता; AIIMS में जिंदगी की जंग जारी ।
- अजीत कुमार दिल्ली: प्राइम इंडिया न्यूज
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के सरिता विहार से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को कटघरे में खड़ा कर दिया है। महज 6-7 दिन का एक नवजात शिशु सड़क किनारे बेसहारा हालत में मिला। जिस मासूम ने अभी दुनिया को ठीक से देखना भी शुरू नहीं किया था, उसे किसी ने जिंदगी की सबसे सुरक्षित जगह—मां की गोद—से दूर कर सड़क के हवाले कर दिया।
नन्ही सी जान… न बोल सकती थी, न किसी को अपना दर्द बता सकती थी। बस सड़क किनारे पड़ी थी और शायद उसकी हर सांस मदद की गुहार लगा रही थी।
लेकिन वक्त रहते साउथ ईस्ट दिल्ली की PCR वैन वहां पहुंच गई।
जहां किसी ने मासूम को छोड़ दिया, वहां वर्दी ने इंसानियत का हाथ थाम लिया
PCR टीम ने नवजात को देखा तो बिना देरी किए उसे रेस्क्यू किया और तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। समय की गंभीरता को देखते हुए मासूम को AIIMS अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है और डॉक्टरों की निगरानी में उसकी देखभाल की जा रही है।
यह घटना सिर्फ एक नवजात के सड़क किनारे मिलने की नहीं है, बल्कि समाज के सामने खड़े उस कड़वे सवाल की भी है
आखिर उस मासूम का कसूर क्या था?
क्या उसकी पहली सांस ही उसके लिए सजा बन गई?
जिसे मां की ममता, परिवार का प्यार और सुरक्षित भविष्य मिलना चाहिए था, उसे सड़क किनारे बेसहारा छोड़ने वाला आखिर कौन है?
सरिता विहार की यह घटना दिल को झकझोर देती है। एक तरफ कोई उस नन्ही सी जान को सड़क पर छोड़कर चला गया, तो दूसरी तरफ PCR टीम ने वक्त पर पहुंचकर इंसानियत का फर्ज निभाया और उस मासूम को जिंदगी की एक नई उम्मीद दी।
अब जरूरत है कि मामले की गंभीरता से जांच कर उस व्यक्ति या उन लोगों तक पहुंचा जाए, जिन्होंने इस नवजात को इस तरह बेसहारा छोड़ दिया।
